बेगूसराय में चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि: बेगूसराय में पहली बार IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक से शिशु के जन्म का दावा किया गया है। शहर के महमदपुर स्थित गौरी एडवांस महिला अस्पताल में डॉ. स्वास्ति कुमारी की देखरेख में यह सफलता हासिल हुई। डॉ. ने प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि 19 अप्रैल को इस प्रक्रिया से स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ है। हालांकि, माता-पिता की सहमति नहीं मिलने के कारण उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। डॉक्टर के अनुसार, बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और किसी प्रकार की जटिलता नहीं है।

क्या है IVF (टेस्ट ट्यूब बेबी) प्रक्रिया: डॉ. स्वास्ति कुमारी ने बताया कि IVF एक आधुनिक चिकित्सा तकनीक है, जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को लैब में निषेचित किया जाता है। इसके बाद विकसित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया लैब में होती है, इसलिए इसे “टेस्ट ट्यूब बेबी” भी आमतौर पर कहा जाता है। यह उन दंपतियों के लिए वरदान है, जिन्हें सामान्य तरीके से संतान प्राप्ति में कठिनाई होती है।
खर्च और समय अवधि: IVF प्रक्रिया अपेक्षाकृत खर्चीली होती है। डॉ. कुमारी के अनुसार, इसमें लगभग 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, जो मरीज की उम्र और स्थिति पर निर्भर करता है। पूरी प्रक्रिया में 3 से 6 महीने तक का समय लग सकता है, जिसमें लगातार जांच, दवाइयां और निगरानी शामिल होती है।

पहले बाहर जाना पड़ता था, अब बेगूसराय में सुविधा: डॉक्टर ने बताया कि पहले इस तरह के इलाज के लिए लोगों को पटना या दिल्ली जाना पड़ता था। लेकिन अब बेगूसराय में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में IVF के लिए आवश्यक लैब और उपकरण मौजूद हैं, जिससे यहां पूरी प्रक्रिया संभव हो पाई है।
काउंसिलिंग है अहम हिस्सा: IVF प्रक्रिया से पहले दंपतियों की काउंसिलिंग की जाती है। इसमें उन्हें इलाज की पूरी प्रक्रिया, संभावित जोखिम, खर्च और मानसिक तैयारी के बारे में विस्तार से बताया जाता है। डॉ. स्वास्ति कुमारी ने बताया कि उन्होंने करीब दो साल पहले क्लिनिक की शुरुआत की थी और 2025 से IVF पर काम शुरू किया था, जिसका परिणाम अब सामने आया है।
बेगूसराय के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि: डॉक्टर का दावा है कि यह बेगूसराय का पहला IVF बेबी है, जो जिले के मेडिकल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशिक्षित स्टाफ की कमी इस क्षेत्र में एक चुनौती है, लेकिन धीरे-धीरे इसे बेहतर किया जा रहा है। इस मौके पर उनके पिता डॉ. राम रतन सिंह और माता मंजू देवी भी उपस्थित रहे।







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