मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई तेज करने का आह्वान
बेगूसराय: 1 अगस्त 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
आज देश के मजदूर सम्मानजनक जीवन जीने की स्थिति में नहीं हैं। अधिकांश मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही है। दिल्ली, मुंबई, नोएडा जैसे महानगरों में वर्तमान मजदूरी पर किसी मजदूर के लिए परिवार का पालन-पोषण करना लगभग असंभव है। सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए गए बदलावों से मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए हैं। बढ़ती महंगाई ने श्रमिकों की स्थिति और कठिन बना दी है। ये बातें भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप्त दत्त ने बेगूसराय के कपस्या स्थित सीटू कार्यालय में कही।

बता दें की भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप्त दत्त, राष्ट्रीय सचिव ए.आर. सिंधु तथा राज्य महासचिव अनुपम कुमार शनिवार को बेगूसराय पहुंचे। वे पटना में आयोजित ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन की जनरल काउंसिल बैठक में भाग लेने के बाद बरौनी रिफाइनरी के असंगठित मजदूरों के लंबे समय से चल रहे आंदोलन का हालचाल जानने बेगूसराय पहुंचे। सीटू कार्यालय में जिला महासचिव अंजनी कुमार सिंह, उपाध्यक्ष रामबालक साहनी, कोषाध्यक्ष रत्नेश झा, बिहार स्टेट ऑटो चालक संघ के नेता विजय रजक, मुकेश पोद्दार, एम्बुलेंस कामगार नेता रामानंद, वाहन चालक संघ के नेता मुकेश झा, खेतिहर मजदूर यूनियन के नेता सूरज रजक, मो. खालिद, मनोरंजन झा, संतोष झा, मो. बारी, बीएसआर यूनियन के नेता राकेश कुमार, किसान नेता सुरेंद्र साह सहित कई नेताओं ने उनका स्वागत किया।

इसके बाद सीटू नेताओं के साथ आयोजित बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप्त दत्त ने कहा कि उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले 14 वर्षों से न्यूनतम मजदूरी का पुनरीक्षण नहीं हुआ है। सरकार द्वारा घोषित मजदूरी भी यदि पूरी तरह लागू हो जाए तो मजदूरों को कुछ राहत मिल सकती है। सुदीप्त दत्त ने बताया कि 29 जुलाई को दिल्ली में हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि 10 अगस्त को पूरे देश में किसान और मजदूर अपनी मांगों को लेकर ‘जेल भरो आंदोलन’ करेंगे। उन्होंने कहा कि देशभर में मजदूर-किसान आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा तथा दिल्ली में महापड़ाव की भी तैयारी की जा रही है।बरौनी रिफाइनरी के असंगठित मजदूरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहां मजदूरों को न तो स्थायी रोजगार मिल रहा है और न ही सरकारी मानकों के अनुरूप मजदूरी। सीटू इस शोषण के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी और देश की सभी 24 रिफाइनरियों के मजदूरों को जोड़कर एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
बैठक के अंत में उन्होंने बेगूसराय में संगठन को और मजबूत करने तथा मजदूरों की लड़ाई को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।








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