05 सितम्बर नई दिल्ली: नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शुक्रवार तड़के 2 बजकर 55 मिनट पर GSLV-F17 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया गया। रॉकेट ने करीब 2,367 किलोग्राम वजनी EOS-05 उपग्रह को सफलतापूर्वक निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया। यह मिशन भारत की पृथ्वी निगरानी क्षमता को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है। GSLV की यह 19वीं उड़ान थी, जबकि श्रीहरिकोटा से यह 107वां प्रक्षेपण रहा।
पहली बार जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की इमेजिंग: EOS-05 मिशन की सबसे खास बात इसकी कक्षा है। यह भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की तस्वीरें लेने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से यह उपग्रह पृथ्वी के बड़े हिस्से पर निगरानी रखने में सक्षम होगा। इसकी मदद से बड़े भौगोलिक क्षेत्रों की तस्वीरें और महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की जा सकेंगी।
एक ही क्षेत्र पर बार-बार नजर रखने में मदद: पृथ्वी की निगरानी करने वाले अधिकांश उपग्रह अलग-अलग कक्षाओं में चक्कर लगाते हुए तस्वीरें लेते हैं। वहीं EOS-05 की कक्षा उसे किसी बड़े क्षेत्र को बार-बार देखने की बेहतर क्षमता प्रदान करेगी। इससे किसी इलाके में समय के साथ होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखना आसान होगा। बाढ़, जंगलों में बदलाव, भूमि उपयोग में परिवर्तन और अन्य प्राकृतिक या मानवीय गतिविधियों की निगरानी में इससे मदद मिल सकती है।
2,367 किलोग्राम है EOS-05 का वजन: GSLV-F17 ने EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाया है। इसके बाद उपग्रह को उसकी निर्धारित परिचालन कक्षा तक पहुंचाया जाएगा।इस मिशन में GSLV-F17 के साथ चार मीटर व्यास वाले ओगिव कंपोजिट पेलोड फेयरिंग का इस्तेमाल किया गया। मिशन की सफलता के साथ भारत की अर्थ ऑब्जर्वेशन यानी पृथ्वी अवलोकन क्षमता में महत्वपूर्ण विस्तार होने की उम्मीद है। कृषि से लेकर आपदा प्रबंधन तक मिलेगा फायदाEOS-05 से प्राप्त होने वाली इमेजरी और डेटा का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है। इनमें कृषि, जल संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और बड़े भौगोलिक क्षेत्रों की निगरानी प्रमुख हैं। विशेष रूप से बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी से प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को स्थिति का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
ISRO की सफलता पर प्रधानमंत्री समेत नेताओं ने दी बधाई: मिशन की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी और इसे देश के लिए गौरव का क्षण बताया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई नेताओं ने भी इस उपलब्धि पर ISRO की टीम को शुभकामनाएं दीं। EOS-05 के सफल प्रक्षेपण को भारत की अंतरिक्ष और पृथ्वी निगरानी क्षमताओं के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस उपग्रह से मिलने वाला डेटा देश में आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी और विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।





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