बेगूसराय, 4 जून 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
उर्दू और हिंदी के प्रसिद्ध शायर जनाब बशीर बद्र की स्मृति में जनवादी लेखक संघ (जलेसं) जिला इकाई, बेगूसराय द्वारा गुरुवार को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम स्थानीय पावर हाउस रोड स्थित सीपीआई(एम) कार्यालय ब्रह्मदेव राय भवन में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता जलेसं के जिला अध्यक्ष एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र साह ने की।
बशीर बद्र को बताया उर्दू-हिंदी शायरी का कोहिनूर: सभा को संबोधित करते हुए डॉ. राजेंद्र साह ने कहा कि बशीर बद्र उर्दू और हिंदी शायरी के कोहिनूर थे। उन्होंने अपनी ग़ज़लों और शायरी के माध्यम से आम लोगों की पीड़ा, संवेदना और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति दी। बशीर बद्र का यह मशहूर शेर बेहद प्रासंगिक हो जाता है—”लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में। “डॉ. साह ने कहा कि उनके निधन से देश की साझा संस्कृति और साहित्यिक विरासत को अपूरणीय क्षति हुई है।
प्रेम, सद्भाव और इंसानियत के शायर थे बशीर बद्र: जनवादी लेखक संघ के राज्य सचिव कुमार विनीताभ ने कहा कि बशीर बद्र ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, एकता, सद्भाव और इंसानियत के मूल्यों को मजबूत करने का काम किया। उन्होंने कहा कि बशीर बद्र स्वयं भी नफरत की राजनीति के शिकार बने थे, लेकिन उन्होंने अपनी शायरी में हमेशा मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दी।
ग़ज़लों ने बनाई खास पहचान: जलेस के उपाध्यक्ष अभिनंदन झा ने बशीर बद्र की दो ग़ज़लों को तरन्नुम में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जगजीत सिंह, चंदन दास सहित कई प्रसिद्ध गायकों ने उनकी ग़ज़लों को अपनी आवाज देकर उन्हें घर-घर तक पहुंचाया। उनके अनुसार बशीर बद्र केवल शायर नहीं बल्कि समाज को दिशा देने वाले संवेदनशील रचनाकार थे।
वक्ताओं ने साझा कीं यादें: जी.डी. कॉलेज के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. जिक्रुल्लाह खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अपने छात्र जीवन की यादों को साझा करते हुए कहा कि बशीर बद्र विद्यार्थियों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। जलेसं के उप सचिव एवं युवा आलोचक डॉ. निरंजन कुमार ने कहा कि बशीर बद्र के शेर आम लोगों की जुबान पर सहजता से चढ़ जाते हैं। उन्होंने उन्हें “उर्दू का दिनकर” बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएं लोगों की भावनाओं और संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति हैं।
जीवन और साहित्य पर हुई विस्तृत चर्चा: युवा कवि एवं शिक्षक मुकेश कुमार ने बशीर बद्र के जीवन, साहित्यिक योगदान और अंतिम दिनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 91 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। वे लंबे समय से डिमेंशिया सहित उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। । सभा में प्रो. चन्द्रशेखर चौरसिया, डॉ. ललिता कुमारी, दीपक कुमार, मंजेश सिंह समेत अनेक साहित्य प्रेमियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन जिला सचिव राजेश कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सीपीआई(एम) जिला सचिव रत्नेश झा ने किया।







Total views : 89146