बेगूसराय। 10 सितंबर। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बेगूसराय में किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए गुरुवार को प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला आयोजित की गई। अर्थ गंगा के तहत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तत्वावधान में यह कार्यक्रम प्रेक्षागृह-सह-आर्ट गैलरी, कंकौल में हुआ।
जिले के विभिन्न प्रखंडों से करीब 450 किसानों ने कार्यशाला में भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन जिला कृषि पदाधिकारी के नेतृत्व में किया गया।
प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय: कार्यशाला का उद्घाटन जिला पदाधिकारी रिची पाण्डेय और उप विकास आयुक्त आकाश चौधरी ने संयुक्त रूप से किया।डीएम ने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा। इससे किसानों की आय को भी लंबे समय तक बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बेगूसराय में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए इसे और व्यापक बनाने पर जोर दिया।
किसानों को मिली तकनीकी जानकारी: कृषि विज्ञान केंद्र, खोदावंदपुर के प्रधान वैज्ञानिक-सह-प्रधान ने किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी।
इस दौरान गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, जैविक संसाधनों का उपयोग, मृदा स्वास्थ्य और जैविक कार्बन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। किसानों को स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्राकृतिक खेती अपनाने के व्यावहारिक तरीके भी बताए गए।
डीडीसी आकाश चौधरी ने प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से संवाद कर उनके अनुभव और चुनौतियों की जानकारी ली। उन्होंने किसानों से अपने अनुभव दूसरे किसानों तक पहुंचाने की अपील की।
गंगा संरक्षण से जुड़ी प्राकृतिक खेती: जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, विकसित भारत, VB-G RAM G-सह-नोडल पदाधिकारी, नमामि गंगे बिट्टू कुमार सिंह ने गंगा संरक्षण और कृषि के बीच संबंध पर जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि खेती में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देने से किसानों के साथ-साथ जल स्रोतों और गंगा की स्वच्छता को भी लाभ मिलेगा।
जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक अविनाश कुमार ने कृषि आधारित आजीविका और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में जीविका की भूमिका बताई।
प्रगतिशील किसानों ने साझा किए अनुभवकार्यशाला में प्रगतिशील किसानों रामकुमार सिंह, शैलेंद्र कुमार चौधरी, जयशंकर सिंह और अशोक सिंह ने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने खेती में अपनाई गई तकनीकों और उनके परिणामों की जानकारी अन्य किसानों को दी। इससे किसानों को प्राकृतिक खेती की व्यावहारिक उपयोगिता समझने में मदद मिली।
कार्यक्रम में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र और जीविका के पदाधिकारियों के अलावा बीटीएम, एटीएम, कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, कृषि सखी और विभिन्न प्रखंडों के किसान मौजूद रहे।
प्राकृतिक खेती एवं संबंधित गतिविधियों में बेहतर सहभागिता करने वाले किसानों और प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
कार्यशाला में किसानों से मिट्टी, जल और पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया गया।





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