दिल्ली 6 अक्टूबर 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
ब्रह्मांड के सबसे मायावी कणों में शामिल न्यूट्रिनो के अध्ययन और खगोलीय मूल के हाई एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज में महत्वपूर्ण योगदान के लिए फ्रांसिस हाल्जन को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार देने का फैसला किया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने उनके आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी से जुड़े योगदान को इस सम्मान के लिए चुना है।
दक्षिण ध्रुव की बर्फ में छिपी वैज्ञानिक संभावना:
हाल्जन ने 1988 में दक्षिण ध्रुव की बर्फ का इस्तेमाल न्यूट्रिनो का पता लगाने के लिए करने का विचार प्रस्तुत किया था। न्यूट्रिनो पदार्थ के साथ बेहद कम प्रतिक्रिया करते हैं, इसलिए वे अंतरिक्ष से लगभग बिना दिशा बदले और ऊर्जा गंवाए पृथ्वी तक पहुंच सकते हैं।
इसी सिद्धांत पर दक्षिण ध्रुव की बर्फ में विशाल प्रकाश सेंसर नेटवर्क तैयार किया गया। जब न्यूट्रिनो किसी परमाणु नाभिक से टकराता है, तो पैदा होने वाली प्रकाश की चमक को सेंसर रिकॉर्ड करते हैं। आज आइसक्यूब दुनिया की सबसे बड़ी न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में शामिल है।
ब्रह्मांड की सबसे ऊर्जावान घटनाओं को समझने में मदद:
आइसक्यूब के आंकड़ों से वैज्ञानिकों को खगोलीय न्यूट्रिनो का अध्ययन करने में सफलता मिली है। इससे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल के आसपास होने वाली प्रक्रियाओं और गामा रे बर्स्ट जैसी अत्यंत ऊर्जावान ब्रह्मांडीय घटनाओं को समझने के नए रास्ते खुले हैं।
न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान के जरिए अब ब्रह्मांड को केवल प्रकाश या अन्य तरंगों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि न्यूट्रिनो की मदद से भी देखा जा सकता है। हाल्जन के वैज्ञानिक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने कठिन परिस्थितियों में इस विशाल परियोजना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।






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