बेगूसराय | 23 मई 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बेगूसराय जिले में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर श्रम विभाग द्वारा विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी क्रम में श्रम अधीक्षक रतीश कुमार के नेतृत्व में गठित धावा दल ने बेगूसराय प्रखंड क्षेत्र में छापेमारी कर 2 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। कार्रवाई के दौरान संबंधित नियोजकों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 (संशोधित 2016) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। श्रम विभाग की टीम ने पुलिस बल के सहयोग से यह अभियान चलाया। श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी ने बताया कि जिले में ढाबों, दुकानों, मोटर गैराज, ईंट-भट्ठों, फैक्ट्रियों और अन्य प्रतिष्ठानों में बाल एवं किशोर श्रमिकों की पहचान के लिए नियमित छापेमारी जारी रहेगी। दोषी पाए जाने वाले नियोजकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बाल श्रम कराना दंडनीय अपराध: श्रम अधीक्षक रतीश कुमार ने कहा कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों तथा 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों को जोखिमयुक्त कार्यों में लगाना कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार दोषी नियोजकों से प्रति बाल श्रमिक 20 हजार रुपये जिला बाल श्रमिक पुनर्वास कोष में जमा कराया जाता है। इसके अलावा विमुक्त बच्चों को तत्काल आर्थिक सहायता, शिक्षा, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी चल रही है। मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत पात्र बाल एवं किशोर श्रमिकों को 25 हजार रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
नियोजकों से अपील: श्रम विभाग ने सभी नियोजकों से बाल श्रम नहीं कराने संबंधी शपथ-पत्र जमा करने तथा दुकानों एवं प्रतिष्ठानों का श्रम विभाग में पंजीकरण कराने की अपील की है। साथ ही भीषण गर्मी को देखते हुए श्रमिकों के लिए पेयजल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है।







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