नई दिल्ली, 25 मई 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
मिथिला एवं मैथिली भाषा प्रेमियों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को शामिल किए जाने की दिशा में सकारात्मक पहल की गई है। इस निर्णय को मैथिली भाषा और संस्कृति के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जुड़ने और उसे शैक्षणिक स्तर पर सीखने का अवसर मिलेगा।
सर्वेश कश्यप ने जताई खुशी: जदयू दिल्ली प्रदेश के प्रदेश महासचिव सर्वेश कश्यप ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय एवं केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मिथिला वासियों के लिए “एक अद्भुत और ऐतिहासिक क्षण” है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मैथिली भाषा को शैक्षणिक मुख्यधारा में उचित स्थान दिलाने की मांग उठती रही है, जिसे अब गंभीरता से स्वीकार किया गया है। यह पहल मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने का कार्य करेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कदम: सर्वेश कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम है। भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए इस प्रकार की पहल भविष्य में काफी प्रभावी साबित होगी।उन्होंने कहा कि मैथिली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा और सामाजिक पहचान का आधार है। CBSE पाठ्यक्रम में इसके शामिल होने से देशभर के लाखों विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में बढ़ावा मिलने की उम्मीद: जदयू दिल्ली प्रदेश ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में मैथिली भाषा को शिक्षा, प्रशासन और तकनीकी क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भारतीय भाषाओं के विकास को नई दिशा मिलेगी और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को मजबूती प्राप्त होगी।






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