बेगूसराय, 24 सितंबर 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
जिला पदाधिकारी रिची पांडेय, के मार्गदर्शन में बेगूसराय जिले में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर विशेष धावा अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी क्रम में श्रम अधीक्षक रतीश कुमार द्वारा गठित धावा दल ने साहेबपुरकमाल प्रखंड में सघन जांच अभियान चलाया।
अभियान के दौरान जिले में कुल 3 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया। इनमें साहेबपुरकमाल प्रखंड से 2 तथा भगवानपुर प्रखंड से 1 बाल श्रमिक शामिल हैं। विमुक्त कराए गए सभी बाल श्रमिकों को आवश्यक कार्रवाई एवं पुनर्वास के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
30 सितंबर तक चलेगा विशेष अभियान: श्रम अधीक्षक रतीश कुमार ने बताया कि बाल श्रम उन्मूलन के उद्देश्य से सितंबर माह में जिले के विभिन्न प्रखंडों में विशेष धावा दल के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान ढाबा, दुकान, प्रतिष्ठान, मोटर गैराज, ईंट-भट्ठा, बीड़ी एवं अन्य कारखानों सहित विभिन्न कार्यस्थलों पर बाल एवं किशोर श्रमिकों के नियोजन की जांच की जा रही है।
इसके साथ ही बंधुआ श्रम से संबंधित मामलों की भी जांच की जा रही है। यह विशेष अभियान 30 सितंबर 2026 तक जिले के सभी प्रखंडों में जारी रहेगा। जांच के दौरान बाल श्रम कराने वाले नियोजकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बाल श्रमिकों के पुनर्वास पर भी जोर: जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि बाल श्रम उन्मूलन के साथ-साथ विमुक्त बाल श्रमिकों को शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने तथा उनके पुनर्वास के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाती है। सरकार एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पात्र बाल श्रमिकों के लिए आर्थिक सहायता एवं पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है।
बाल श्रम से संबंधित मामलों में नियोजक से प्रति बाल श्रमिक 20 हजार रुपये जिला बाल श्रमिक पुनर्वास कोष में जमा कराने का प्रावधान है। पात्र विमुक्त बाल श्रमिकों को तत्काल आर्थिक सहायता के रूप में 3 हजार रुपये प्रति बाल श्रमिक दिए जाने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त बाल कल्याण समिति द्वारा पुनर्वास एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
मुख्यमंत्री राहत कोष से 25 हजार रुपये का प्रावधान
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत विमुक्त 14 वर्ष से कम आयु के बाल श्रमिकों के पुनर्वास के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 25 हजार रुपये का अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।
इसी प्रकार 14 से 18 वर्ष की आयु के विमुक्त किशोर श्रमिकों, जिनका विवरण चाइल्ड लेबर ट्रैकिंग सिस्टम में दर्ज है, के लिए भी मुख्यमंत्री राहत कोष से 25 हजार रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में बाल श्रम के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठानों एवं नियोजकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी तथा विमुक्त बाल श्रमिकों की शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
— नेशनल पॉजिटिव न्यूज़






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