बेगूसराय : 12 अगस्त 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
लाइब्रेरियन सिर्फ किताबों को संभालने का काम नहीं करते, बल्कि वे ज्ञान, तकनीक और सीखने के आधुनिक केंद्र के रूप में पाठकों को सही और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराते हैं। यूँ कहें कि प्रत्येक पाठक को उसकी जरूरत के अनुसार सही पुस्तक और सूचना तक पहुँचाना ही लाइब्रेरियन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
पुस्तकालय विज्ञान के विशेषज्ञ एवं भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक माने जाने वाले डॉ. एस. आर. रंगनाथन की जयंती के अवसर पर प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को लाइब्रेरियन डे (राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस) मनाया जाता है। डॉ. रंगनाथन ने पुस्तकालय विज्ञान के पांच महत्वपूर्ण नियम दिए और पुस्तकालयों को केवल किताबों को अलमारी में बंद रखने की जगह लोगों तक ज्ञान पहुंचाने का माध्यम बनाने की आधुनिक सोच विकसित की।
उन्होंने कोलन क्लासिफिकेशन और कैटलॉगिंग कोड जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं विकसित कीं। उनके द्वारा 60 से अधिक पुस्तकें और 2000 से अधिक शोध-पत्र लिखे गए। उन्होंने वर्ष 1957 में यूजीसी द्वारा गठित लाइब्रेरियन कमेटी की अध्यक्षता की। वर्ष 1961 में रिव्यू कमेटी और लाइब्रेरी साइंस से संबंधित कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत सरकार ने वर्ष 1957 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
डॉ. रंगनाथन ने शिक्षा के साथ-साथ पुस्तकालयों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज हम डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बात करते हैं, जो घर बैठे हर तरह की जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। लेकिन पाठकों तक ज्ञान पहुंचाने की यह सोच रंगनाथन ने बहुत पहले विकसित कर दी थी। 21 अक्टूबर 1931 को उन्होंने बैलगाड़ी पर मोबाइल लाइब्रेरी की शुरुआत की, जो घर-घर जाकर पाठकों को पढ़ने की सुविधा उपलब्ध कराती थी। आज डिजिटल युग में जिस तरह पाठकों की सुविधा के अनुसार ज्ञान उनके पास पहुंच रहा है, उसकी कल्पना रंगनाथन ने दशकों पहले ही कर ली थी।
आज के दौर में AI को पुस्तकालय और लाइब्रेरियन के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली सहयोगी के रूप में देखना चाहिए। डिजिटल युग में लाइब्रेरी और लाइब्रेरियन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि वे पाठकों को विश्वसनीय, उपयोगी और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।
पुस्तकालय की उपयोगिता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। आज पुस्तकालय केवल पढ़ने की जगह नहीं, बल्कि नया सोचने, सीखने, रचने और संवाद करने का स्थान बनते जा रहे हैं। यह एक तरह से ‘थर्ड स्पेस’ के रूप में विकसित हो रहा है, जहां कॉलेज और ऑफिस के अलावा लोग अपने सीखने और रचनात्मक गतिविधियों के लिए समय बिताना पसंद करते हैं।
हर व्यक्ति को पुस्तकालय जाने और पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए, खासकर बच्चों को। आधुनिक पुस्तकालयों में बच्चों और युवाओं की रुचि के अनुसार कोडिंग, प्रोग्रामिंग, गेमिंग, स्टोरी टेलिंग, ग्रुप कम्युनिकेशन, रिसर्च, सूचना संसाधन और ई-लाइब्रेरी जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं। इनके माध्यम से वे अपनी रुचि के अनुसार नई चीजें सीख सकते हैं, सही सूचना की पहचान कर सकते हैं, फेक न्यूज से बच सकते हैं और अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकते हैं।
लाइब्रेरियन डे हमें यह याद दिलाता है कि हमारे जीवन में किताबों और उन्हें पाठकों तक पहुंचाने वाले लाइब्रेरियन का कितना महत्वपूर्ण योगदान है। यह उन सभी पुस्तकालयाध्यक्षों के निस्वार्थ कार्य, ज्ञान के प्रति समर्पण और समाज को शिक्षित करने के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक सुंदर अवसर है।—
श्वेता कुमारी,
लाइब्रेरियन, श्री कृष्ण महिला महाविद्यालय, बेगूसराय (बिहार)







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