बेगूसराय। 6 सितंबर2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
जिले में गंगा नदी के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। रविवार को समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभा भवन में जिला पदाधिकारी रिची पांडेय ने प्रेस वार्ता कर बाढ़ की वर्तमान स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रशासन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है।
जिला पदाधिकारी के अनुसार दोपहर 12 बजे गंगा नदी का जलस्तर 43.51 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 41.76 मीटर है। गंगा का उच्चतम बाढ़ स्तर 43.52 मीटर है। जलस्तर की स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित पदाधिकारियों को लगातार क्षेत्र में निगरानी रखने और जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।
39 पंचायतों के 95 हजार से अधिक परिवार प्रभावित
वर्तमान में जिले के 8 प्रखंडों की 39 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें 37 ग्राम पंचायतें और 2 नगर क्षेत्र शामिल हैं। बाढ़ से कुल 189 गांवों के 95,245 परिवार, यानी लगभग 3 लाख 80 हजार 900 लोग प्रभावित हुए हैं।
223 नावों का हो रहा परिचालन: बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और राहत कार्यों के लिए उपलब्ध 260 नावों में से 223 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनमें 13 सरकारी और 210 निजी नावें शामिल हैं। प्रशासन ने नावों पर ओवरलोडिंग नहीं करने और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सरकारी नावों पर प्रशासन का बैनर लगाया गया है, जिससे लोगों को यह स्पष्ट हो कि सरकारी नाव सेवा निःशुल्क है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त नावों की व्यवस्था भी की जाएगी।
SDRF और NDRF की टीमें तैनात: आपात स्थिति में त्वरित बचाव के लिए SDRF की टीम बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी और शाम्हो प्रखंडों में तैनात की गई है। वहीं NDRF की टीम बलिया प्रखंड में प्रतिनियुक्त की गई है।
85 सामुदायिक रसोई में 28 हजार से अधिक लोगों को भोजन: बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में फिलहाल 85 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 28,653 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है।
जिला प्रशासन ने निर्देश दिया है कि जिन इलाकों में लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर गया है, वहां आवश्यकता के अनुसार तत्काल सामुदायिक रसोई शुरू की जाए। बुजुर्गों और ऐसे लोगों के लिए सूखा राशन उपलब्ध कराने को भी कहा गया है, जो सामुदायिक रसोई तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
36 मेडिकल कैंप, 5 हजार से अधिक लोगों का उपचार:
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 36 मेडिकल कैंप लगातार संचालित किए जा रहे हैं। अब तक मेडिकल टीमों ने 5,164 मरीजों की जांच और उपचार कर उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई हैं।
दियारा और जलमग्न क्षेत्रों में बोट एम्बुलेंस और बोट मेडिकल कैंप के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। गर्भवती महिलाओं को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस को समन्वय से काम करने का निर्देश दिया गया है।
840 पशुओं का उपचार और टीकाकरण: पशुधन की सुरक्षा के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 8 पशु चिकित्सा कैंप चलाए जा रहे हैं। अब तक 840 पशुओं का उपचार एवं टीकाकरण किया गया है। वहीं पशुपालकों के बीच 345 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है।
27 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित: कृषि विभाग के अनुसार जिले में 27,034 हेक्टेयर कृषि रकबा बाढ़ से प्रभावित हुआ है। पानी उतरने के बाद विस्तृत सर्वेक्षण कराकर फसल क्षति का आकलन किया जाएगा और नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जाएगी।
सभी तटबंध सुरक्षित, 24 घंटे निगरानी: जिला पदाधिकारी ने बताया कि जिले के सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं। जल संसाधन विभाग की टीम द्वारा तटबंधों की 24 घंटे निगरानी और गश्ती की जा रही है। किसी भी रिसाव या अन्य समस्या की सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
जिला प्रशासन ने कहा कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार तक राहत और आवश्यक सेवाएं पहुंचाना प्राथमिकता है। स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है और जरूरत के अनुसार संसाधनों में वृद्धि की जाएगी।
डीएम की लोगों से अपील: जिला पदाधिकारी रिची पांडेय ने जिलेवासियों से धैर्य बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। उन्होंने लोगों से गहरे पानी वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचने तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या जिला आपदा नियंत्रण कक्ष को तत्काल सूचना देने की अपील की।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता और सुरक्षा के लिए सभी संबंधित विभागों एवं पदाधिकारियों को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है।





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