पटना/बिहटा। 23 फ़रवरी 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पल तब आया जब बिहटा स्थित प्रिस्टीन ड्राई पोर्ट से 5 टन ‘मिथिला मखाना’ की खेप चीन के लिए रवाना की गई। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने हरी झंडी दिखाकर इस निर्यात की औपचारिक शुरुआत की। इसे बिहार के कृषि निर्यात में नई क्रांति का संकेत माना जा रहा है।
कृषि मंत्री ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया : मौके पर कृषि मंत्री ने इसे बिहार के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक पहल बतातें हुए कहा कि बिहार की पहचान मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इससे राज्य के किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और उन्हें वैश्विक बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।
🚢 बिहटा से चीन तक का सफर: निर्यातित मखाना पहले कोलकाता बंदरगाह पहुंचेगा, जहां से समुद्री मार्ग के जरिए चीन भेजा जाएगा। यह उपलब्धि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, बिहार सरकार और APEDA (एपीडा) के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। जनवरी 2026 में 2 मीट्रिक टन मखाना संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) भेजा गया था। लगातार बढ़ते निर्यात से स्पष्ट है कि बिहार का मखाना अब वैश्विक ‘सुपरफूड’ के रूप में पहचान बना रहा है।
💊 चीन में मखाना का महत्व: चीन में मखाना केवल खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि पारंपरिक औषधि (TCM) में भी उपयोग होता है। विशेष रूप से किडनी संबंधी दवाओं में इसे जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता है। ‘मिथिला मखाना’ को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी गुणवत्ता और शुद्धता पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भरोसा और मजबूत हुआ है।
💰 किसानों को मिलेगा लाभ और अनुदान: बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ (COFFED) के निदेशक ऋषिकेश कश्यप के अनुसार मखाना, मछली और सिंघाड़ा की खेती के लिए बीज, भंडारण और आधुनिक मशीनों पर 50% तक सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही तालाबों के वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। ‘सात निश्चय-2’ समेत अन्य योजनाओं के तहत जल-आधारित कृषि को प्राथमिकता दी गई है।
🌟 आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण: कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में मखाना अब “बिहार की शान” से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि सीधे निर्यात से बिचौलियों की भूमिका घटेगी और किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का उचित मूल्य मिलेगा। यह पहल ‘विकसित बिहार’ की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है, जिससे कृषि क्षेत्र में आय, रोजगार और निवेश—तीनों में वृद्धि की उम्मीद है।








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