नाबार्ड और जिला उद्योग केंद्र की पहल से महिलाओं एवं छात्राओं को मिला कला और स्वरोजगार का मंच, डीएम ने प्रतिभागियों की सराहना की
बेगूसराय, 23 जून 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
नाबार्ड एवं जिला उद्योग केंद्र, बेगूसराय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय चित्रकला प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभा भवन में भव्य पेंटिंग प्रदर्शनी के साथ समापन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं एवं छात्राओं में कला कौशल का विकास करना, उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रोत्साहित करना तथा मिथिला चित्रकला जैसी पारंपरिक लोक कलाओं को बढ़ावा देना था।
प्रदर्शनी में दिखी बिहार की सांस्कृतिक विरासत: समापन अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी में प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं एवं छात्राओं द्वारा तैयार की गई मिथिला पेंटिंग सहित विभिन्न कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया। चित्रों में बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराएं, प्रकृति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को आकर्षक एवं रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया। रंगों के सुंदर संयोजन और प्रतिभागियों की कलात्मक अभिव्यक्ति ने प्रदर्शनी में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कई कलाकृतियों में मिथिला कला की पारंपरिक शैली और आधुनिक सोच का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
डीएम ने की प्रतिभागियों की सराहना: जिला पदाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मिथिला चित्रकला बिहार की पहचान और गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ महिलाओं एवं युवतियों के लिए स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर भी सृजित करते हैं।
कला से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: जिला पदाधिकारी ने प्रतिभागियों के उत्साह, रचनात्मकता और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि कला व्यक्ति की कल्पनाशीलता को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागी अपनी कला को और निखारते हुए राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान स्थापित करेंगे। कार्यक्रम में जिला उद्योग प्रबंधक सुश्री ज्ञानेश्वरी, कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम सहनी, प्रशिक्षक, प्रतिभागी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को भविष्य में भी कला एवं कौशल विकास गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया गया। यह कार्यक्रम न केवल कला संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, बल्कि महिलाओं और छात्राओं के लिए आत्मनिर्भरता एवं रोजगार के नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त कर गया।








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