पटना/नई दिल्ली। 19 जून 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बिहार की पहचान और लोक आस्था के महापर्व छठ का प्रमुख प्रसाद ठेकुआ अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी खास पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्लोवाकिया दौरे के दौरान वहां के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और संसद के स्पीकर रिचर्ड राशि को उपहार स्वरूप ठेकुआ भेंट कर बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए विशेष उपहारों में ब्रास डोकरा एंटेलोप सेट, हिमरू सिल्क टाई एवं पॉकेट स्क्वायर, राजस्थान की कोथेवा कला से बने कफलिंक्स, चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे भारतीय ज्ञान एवं शिल्प परंपरा से जुड़े उपहार शामिल थे। इन्हीं के बीच बिहार-झारखंड की सांस्कृतिक पहचान ठेकुआ भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना।
बिहार की लोक आस्था का प्रतीक है ठेकुआ: ठेकुआ बिहार और झारखंड का पारंपरिक मीठा व्यंजन है, जिसे गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी, घी और सौंफ से तैयार किया जाता है। विशेष रूप से छठ महापर्व के प्रसाद के रूप में इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता बेहद गहरी है। लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला यह प्रसाद बिहार की लोक संस्कृति, पारिवारिक परंपरा और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को ठेकुआ भेंट किए जाने को बिहार की सांस्कृतिक पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल छठ महापर्व की महिमा वैश्विक स्तर पर पहुंची है, बल्कि बिहार के पारंपरिक खान-पान को भी नई पहचान मिली है।
बिहार के लिए गर्व का क्षण: जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ठेकुआ केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि बिहार की लोक परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छठ महापर्व और ठेकुआ की पहचान एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है और इसकी वैश्विक पहचान बढ़ना पूरे बिहार के लिए सम्मान की बात है।
वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि कभी गांवों और छठ पर्व तक सीमित रहने वाला ठेकुआ आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंच गया है। यह बिहार की सांस्कृतिक शक्ति और भारतीय परंपराओं की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
वैश्विक मंच पर बढ़ रही भारतीय और बिहारी विरासत की पहचान: योग, आयुर्वेद, मिलेट्स और भारतीय परंपराओं को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के बाद अब बिहार के पारंपरिक प्रसाद ठेकुआ का सम्मान भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को मजबूती मिलने के साथ-साथ बिहार की सकारात्मक छवि भी दुनिया भर में मजबूत होगी। बिहारवासियों के लिए यह एक गौरवपूर्ण क्षण है कि छठ महापर्व की आत्मा कहे जाने वाले ठेकुआ ने अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भी अपनी जगह बना ली है। यह न केवल बिहार की संस्कृति का सम्मान है, बल्कि उस मिट्टी की मिठास का भी सम्मान है, जिसने सदियों से अपनी परंपराओं को संजोकर रखा है।







Total views : 98488