प्रसव के दौरान शिशु की निगरानी और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने पर दिया गया जोर
बेगूसराय, 12 अक्टूबर 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बेगूसराय में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से आयोजित कार्डियोटोकोग्राफी (CTG) प्रशिक्षण कार्यक्रम की आठ बैचों की श्रृंखला सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। मॉडल जिला अस्पताल, बेगूसराय में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय और समस्तीपुर जिले के कुल 126 स्त्री रोग विशेषज्ञों, डॉक्टरों, जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (GNM) तथा ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफरी (ANM) कर्मियों ने भाग लिया। सिविल सर्जन, बेगूसराय के पत्रांक DHSBGS/26-27/1244, दिनांक 30 सितंबर 2026 के आलोक में यह प्रशिक्षण 1, 5, 6, 7, 8, 9, 10 और 12 अक्टूबर को आयोजित किया गया।
भ्रूण संकट की समय पर पहचान करना मुख्य उद्देश्य: प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रसव के दौरान गर्भस्थ शिशु की हृदय गति और उसकी स्थिति की निगरानी करने के लिए CTG तकनीक के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना था। यह तकनीक प्रसव के दौरान भ्रूण संकट (Fetal Distress) की समय पर पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रशिक्षण के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को यह जानकारी दी गई कि CTG रिपोर्ट का सही विश्लेषण कर समय पर चिकित्सकीय निर्णय लेने से जन्म के समय होने वाले श्वासावरोध (Birth Asphyxia) और नवजात मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल सकती है।
व्यावहारिक प्रशिक्षण पर दिया गया जोर: कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को CTG ग्राफ की पहचान, उसकी व्याख्या (Interpretation) और रिपोर्ट के आधार पर उचित चिकित्सकीय निर्णय लेने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इससे प्रसव के दौरान गर्भस्थ शिशु की स्थिति का बेहतर आकलन करने और संभावित जटिलताओं से निपटने में स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
सिविल सर्जन और DPM ने बताया प्रशिक्षण का महत्व प्रशिक्षण के दौरान जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) नसीम और सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह ने CTG प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रसव के दौरान भ्रूण की निगरानी के लिए CTG एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है। इसके माध्यम से भ्रूण संकट की समय पर पहचान कर आवश्यक चिकित्सकीय कदम उठाए जा सकते हैं। इससे जन्म के समय श्वासावरोध और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने में सहायता मिल सकती है। दोनों अधिकारियों ने प्रशिक्षण में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया।
पीरामल फाउंडेशन ने किया सहयोग: प्रशिक्षण कार्यक्रम की सभी आठ बैचों के सफल आयोजन में पीरामल फाउंडेशन के श्री ज्ञानोदय प्रकाश ने सक्रिय सहयोग और समन्वय प्रदान किया। जिला स्वास्थ्य समिति ने प्रशिक्षण के सफल समापन में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। इस प्रशिक्षण से चार जिलों के स्वास्थ्यकर्मियों को CTG तकनीक के बेहतर उपयोग की जानकारी मिली है, जिससे प्रसव के दौरान सुरक्षित मातृत्व और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल की दिशा में सकारात्मक योगदान मिलने की उम्मीद है।





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