महिला समानता दिवस। 26 अगस्त। डॉ सोनल गर्ग कि. ख़ास रिपोर्ट
महिलाओं को वास्तविक समानता दिलाने के लिए सबसे पहले लड़कियों को उचित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देनी चाहिए। केवल औपचारिक या दिखावे की पढ़ाई से बदलाव संभव नहीं है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो उन्हें ज्ञान, आत्मविश्वास और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाए।
दूसरा महत्वपूर्ण कदम महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना है। महिलाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे अपनी आत्मरक्षा के लिए सक्षम हैं और अपने परिवार, समाज तथा देश के प्रति उनकी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। जब महिला के भीतर यह आत्मविश्वास जागेगा कि वह स्वयं अपने जीवन के फैसले लेने और अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने में सक्षम है, तभी वह अपनी प्रतिभा को पूरी तरह सामने ला सकेगी।
समाज को भी महिलाओं के प्रति अपने मन से परायापन की भावना मिटानी होगी। यह परायापन महिलाओं के भीतर हीन भावना को जन्म देता है और उन्हें अपने ही परिवार तथा समाज में अपनी जगह तलाशने के लिए मजबूर करता है। जब तक महिला अपने अस्तित्व को स्वीकार नहीं करेगी और समाज उसे परिवार, समाज और देश की एक समान एवं सुयोग्य सदस्य के रूप में सम्मान नहीं देगा, तब तक उसकी वास्तविक क्षमता सामने नहीं आ पाएगी।
महिला को यह विश्वास मिलना चाहिए कि वह अपने परिवार, समाज और देश की उतनी ही महत्वपूर्ण सदस्य है जितना कोई पुरुष। उसका योगदान भी सराहनीय है और वह भी सक्षम है। जब यह सोच मजबूत होगी, तब महिला स्वतः सम्मान और समान अधिकार की पात्र बनेगी।






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