महिला सामनता दिवस पर विशेष। 26 अगस्त। डॉ. सोनल गर्ग की ख़ास रिपोर्ट
सुकन्या आचार्य, एडवोकेट | बैंगलोर का कहना हो कि महिलाओं को वास्तविक समानता देने के लिए सबसे पहले समान अधिकारों के साथ समान अवसर और निर्णय लेने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी होगी। परिवारों को बेटियों और बेटों की शिक्षा, करियर और स्वतंत्रता को लेकर समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
सरकार को सुरक्षित कार्यस्थल, समान वेतन, कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन तथा महिलाओं के लिए आर्थिक और राजनीतिक अवसर बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। वहीं, समाज को महिलाओं की क्षमता और उनके व्यक्तिगत चुनावों का सम्मान करना चाहिए, न कि उनकी भूमिका को केवल पारंपरिक जिम्मेदारियों तक सीमित रखना चाहिए।
महिलाओं की वास्तविक समानता के लिए यदि सिर्फ तीन बड़े बदलाव : पहला बदलाव समान अवसर और समान वेतन का होना। दूसरा बदलाव सुरक्षा और स्वतंत्रता का। महिलाओं को घर, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। उन्हें अपने जीवन, करियर और विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बदलाव मानसिकता में परिवर्तन है। परिवार और समाज में बेटियों और बेटों के पालन-पोषण, घरेलू जिम्मेदारियों और स्वतंत्रता को लेकर समान सोच विकसित करनी होगी। वास्तविक समानता केवल कानून बदलने से नहीं, बल्कि सामाजिक सोच बदलने से आएगी।






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