महिला समानता दिवस ( 26 अगस्त )। डॉ. सोनल गर्ग की विशेष रिपोर्ट।
कोलकाता की इंजीनियर ऋचा अग्रवाल ने महिला समानता को लेकर अपनी राय साझा करते हुए कहा कि महिलाओं को वास्तविक समानता दिलाने के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऋचा अग्रवाल का कहना है कि परिवार में घर के कामों का समान बंटवारा होना चाहिए। महिलाओं के करियर और भविष्य से जुड़े फैसलों का सम्मान किया जाना जरूरी है। साथ ही, बचपन से ही बेटे और बेटी को समान अधिकार और अवसर दिए जाने चाहिए, ताकि उनके बीच किसी तरह का भेदभाव पैदा न हो।
समाज के रूढ़िवादी सोच को बदलना जरूरी है। महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने के साथ-साथ उन्हें नेतृत्व के पदों पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित और समर्थित किया जाना चाहिए।
सरकार से अपेक्षाओं को लेकर ऋचा ने कहा कि महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों को कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करना और कामकाजी माताओं के लिए बेहतर चाइल्डकेयर एवं शिशु गृह सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
समानता के लिए तीन बड़े बदलाव जरूरी: ऋचा अग्रवाल के अनुसार महिला समानता के लिए जरुरी है –
1. सुरक्षित माहौल: सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो तथा हिंसा या उत्पीड़न के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
2. आर्थिक आत्मनिर्भरता: महिलाओं को रोजगार के समान अवसर मिलें और पुरुषों एवं महिलाओं के वेतन में किसी तरह का भेदभाव समाप्त किया जाए।
3. सोच में बदलाव: समाज में यह धारणा बदलनी होगी कि घर का काम और बच्चों की देखभाल केवल महिलाओं की जिम्मेदारी है। परिवार में जिम्मेदारियों का समान बंटवारा होना चाहिए।







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