महिला समानता दिवस। 26 अगस्त। डॉ. सोनल गर्ग की ख़ास रिपोर्ट
उमा रोहिला | क्रेडिट एनालिस्ट, कोलकाता: महिलाओं को वास्तविक समानता दिलाने के लिए परिवार, समाज और सरकार—तीनों स्तरों पर बदलाव जरूरी है। मेरे अनुसार इसके लिए तीन बड़े कदम उठाए जाने चाहिए। पहला बदलाव परिवार में जरूरी है। बेटा और बेटी के बीच किसी भी तरह का भेदभाव खत्म होना चाहिए। घर के काम से लेकर महत्वपूर्ण फैसलों तक महिलाओं को बराबरी का अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।
दूसरा बदलाव समाज की सोच में होना चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देने के साथ-साथ उनके चरित्र पर सवाल उठाने वाली सोच को बदलना जरूरी है। किसी महिला के साथ होने वाले अन्याय के लिए उसे ही जिम्मेदार ठहराने के बजाय समाज को अपनी मानसिकता बदलनी होगी।
तीसरा बदलाव सरकार के स्तर पर जरूरी है। महिलाओं को शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिलें और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का सख्ती से पालन हो। जब महिला सुरक्षित और निडर महसूस करेगी, तभी वह अपने सपनों और क्षमताओं के साथ आगे बढ़ सकेगी।
वास्तविक समानता तभी संभव है, जब बराबरी केवल शब्दों में नहीं, बल्कि परिवार, समाज और व्यवस्था के व्यवहार में भी दिखाई दे।






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