महिला समानता दिवस विशेष। 26 अगस्त। डॉ. सोनल गर्ग की ख़ास रिपोर्ट
कपूरथला की कत्थक नृत्यांगना डॉ. रश्मि शिखा ने महिला समानता को लेकर अपनी राय साझा करते हुए कहा कि महिलाओं को वास्तविक समानता तभी मिलेगी, जब परिवार, समाज और सरकार—तीनों अपनी सोच और कार्यप्रणाली में बदलाव लाएं। उनके अनुसार महिला समानता की शुरुआत घर से होती है और इसमें परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
डॉ. रश्मि शिखा का कहना है कि परिवार में बेटी और बेटे के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। साथ ही, बहू को केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसे परिवार की बेटी और एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में सम्मान दिया जाना चाहिए। उसकी शिक्षा, नौकरी, निर्णय लेने की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत इच्छाओं का भी सम्मान होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित और समान अवसर मिलने चाहिए। वहीं सरकार को महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने वाली योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए।
डॉ. रश्मि शिखा के अनुसार, जब परिवार में बेटी, बहू और बेटे को समान अधिकार, अवसर और सम्मान मिलेगा, तभी महिला समानता का वास्तविक लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।महिलाओं की वास्तविक समानता के लिए तीन बदलाव जरूरी-
1. परिवार में समान अधिकार और सम्मान: बेटी और बहू के बीच भेदभाव समाप्त होना चाहिए।
2. शिक्षा और आत्मनिर्भरता का अवसर: हर लड़की और बहू को अपनी शिक्षा पूरी करने, अपनी प्रतिभा विकसित करने और अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
3. सोच में बदलाव: समाज को यह सोच बदलनी होगी कि महिलाएं कमजोर हैं या उनकी भूमिका केवल घर संभालने तक सीमित है। महिलाओं को समान अधिकारों और जिम्मेदारियों वाला स्वतंत्र व्यक्ति मानना होगा।






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