बेगूसराय। 30 अक्टूबर 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बेगूसराय और आसपास के क्षेत्रों में फैटी लीवर के मरीजों की संख्या अधिक पाई जा रही है। इसका एक संभावित कारण यहां के पानी में आयरन एवं क्लोरीन की अधिक मात्रा होना बताया जा रहा है। यह बातें सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने शनिवार को राजकीय अयोध्या शिवकुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय में आयोजित छह दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहीं।
भारतीय चिकित्सा केंद्रीय आयोग के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में अंतिम वर्ष की परीक्षा दे चुके विद्यार्थियों को चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी, चिकित्सकीय आचरण एवं अस्पताल की कार्यप्रणाली से अवगत कराया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने किया।
छात्रों को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन ने कहा कि चिकित्सा पेशे में आने से पहले विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व और व्यवहार को इस तरह विकसित करना चाहिए, जिससे वे समाज में एक अच्छे चिकित्सक के रूप में पहचान बना सकें। मरीजों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करना और उनकी स्थिति के अनुरूप सही चिकित्सा पद्धति अपनाना एक चिकित्सक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा की सभी पद्धतियों का मूल उद्देश्य मरीज का उपचार करना और उसे स्वस्थ रखना है। आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में विभिन्न प्रकार की दवाएं और उपचार के साधन उपलब्ध हैं, जिनसे मरीजों के लिए उचित उपचार का चयन करना आसान हुआ है।
डॉ. अशोक कुमार ने विद्यार्थियों को ज्ञान अर्जित करने के आधुनिक माध्यमों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि आज एआई, गूगल और इंटरनेट के माध्यम से जानकारियां आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन बेहतर चिकित्सक बनने के लिए गुरु का मार्गदर्शन बेहद जरूरी है। बिना गुरु के मार्गदर्शन के ज्ञान को सही दिशा देना संभव नहीं है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थियों ने अंतिम वर्ष की परीक्षा दे दी है और अब उन्हें परिणाम का इंतजार है। परिणाम प्रकाशित होने के बाद वे चिकित्सा व्यवसाय के क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे धैर्य और शांत मन से मरीजों की बीमारी को समझें तथा उसके अनुसार उपचार शुरू करें।
कार्यक्रम के कोऑर्डिनेटर डॉ. मुन्ना कुमार ने विद्यार्थियों को अपना व्यक्तित्व सरल रखने और मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने की सलाह दी।
इससे पूर्व अतिथियों ने भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार को शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानित किया।
छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए गए। डॉ. मुन्ना कुमार ने कोड ऑफ कंडक्ट एवं हॉस्पिटल ड्यूटी प्रोटोकॉल, डॉ. विजेंद्र कुमार ने नवजात शिशुओं से संबंधित विषयों, डॉ. दिलीप कुमार वर्मा ने बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल एवं संक्रमण प्रबंधन तथा डॉ. सुशांत कुमार ने कम्युनिकेशन स्किल और क्रिटिकल थिंकिंग पर विद्यार्थियों को जानकारी दी।
इस अवसर पर उपाधीक्षक डॉ. दिलीप कुमार वर्मा सहित डॉ. जीपी शुक्ला, डॉ. अखिलेश कुमार जायसवाल, डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह, डॉ. रामनंदन सहनी, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. नंद कुमार साहनी, डॉ. विजेंद्र कुमार, डॉ. इंदु कुमारी, डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सुशांत कुमार एवं डॉ. अमलेश कुमार सहित महाविद्यालय के अन्य चिकित्सक और विद्यार्थी उपस्थित थे।
प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी के नेतृत्व में संचालित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम छह दिनों तक चलेगा।






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