बेगूसराय, 2 जून 2026: नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
कला एवं संस्कृति कार्यालय, बेगूसराय द्वारा मंगलवार को बेगूसराय संग्रहालय में इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में जी.डी. कॉलेज, बेगूसराय के प्राचीन इतिहास विषय के छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ संग्रहालय कार्यों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।सीबीसीएस (चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) के अंतर्गत सत्र 2023-27 से संचालित बी.ए., बी.एससी. एवं बी.कॉम. पाठ्यक्रमों के पांचवें सेमेस्टर में इंटर्नशिप को अनिवार्य घटक के रूप में शामिल किया गया है। इसके तहत विद्यार्थियों को 120 घंटे का प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा, जिससे उनकी डॉक्यूमेंटेशन, रिपोर्ट लेखन, प्रस्तुतीकरण एवं व्यावहारिक दक्षता का विकास हो सके।
संग्रहालय की कार्यप्रणाली और विरासत संरक्षण की मिलेगी जानकारी: इंटर्नशिप के दौरान प्रतिभागियों को संग्रहालय की अवधारणा, प्रशासनिक व्यवस्था, कार्यप्रणाली, कलाकृतियों के अभिलेखीकरण एवं संरक्षण, प्रदर्शनी प्रबंधन, प्रकाशीय व्यवस्था तथा विशेष प्रदर्शनी के महत्व के बारे में सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा संग्रहालय में शिक्षा, शोध और प्रकाशन से संबंधित गतिविधियों की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संग्रहालय अध्ययन और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के क्षेत्र में नई सीख और अनुभव प्राप्त होंगे।
बेगूसराय की ऐतिहासिक विरासत से होंगे रूबरू: इंटर्नशिप के दौरान छात्र-छात्राओं को पुरातत्व वीथिका, बेगूसराय जिले के प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक विरासतों तथा पर्यटन से जुड़े विषयों पर अध्ययन और फील्ड आधारित कार्य भी कराया जाएगा। यह कार्यक्रम 20 जून 2026 तक संचालित होगा।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने किया उद्घाटन: कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-सहायक संग्रहालयाध्यक्ष श्याम कुमार सहनी ने किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को संग्रहालय की भूमिका, उसके महत्व तथा बेगूसराय की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं विषय विशेषज्ञ सगुफ्ता बेगम ने संग्रहालय के इतिहास एवं उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह इंटर्नशिप कार्यक्रम विद्यार्थियों में संग्रहालय अध्ययन, विरासत संरक्षण एवं सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।






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