बेगूसराय। 11 सितंबर। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बेगूसराय में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत, बचाव और पुनर्वास कार्य तेज कर दिए हैं। जिला पदाधिकारी रिची पांडेय के नेतृत्व में प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है। जरूरतमंद परिवारों तक समय पर राहत पहुंचाने के लिए संबंधित विभागों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं।
शुक्रवार दोपहर 2 बजे गंगा नदी का जलस्तर 43 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 41.76 मीटर से ऊपर है। हालांकि, गंगा का सर्वोच्च बाढ़ स्तर (HFL) 43.52 मीटर है। जिले के सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ से 8 प्रखंड और 189 गांव प्रभावित: बाढ़ से जिले के 8 प्रखंड प्रभावित हैं। इनमें 37 ग्राम पंचायत और 2 नगर पंचायत सहित कुल 39 पंचायत शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार 189 गांव, 95,245 परिवार और करीब 3,80,980 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए कुल 269 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनमें 23 सरकारी और 246 निजी नाव शामिल हैं। बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी और शाम्हो में SDRF की तैनाती की गई है। वहीं बलिया क्षेत्र में NDRF की टीम राहत और बचाव कार्य में लगी है।
269 नावों और 183 सामुदायिक रसोई से राहत:
बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिले में 183 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों से अब तक 7,42,141 थाली भोजन वितरित किया जा चुका है। प्रभावित परिवारों को पॉलिथीन शीट भी उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 31,113 पॉलिथीन शीट वितरित की गई हैं। वर्तमान में 41,880 पॉलिथीन शीट उपलब्ध हैं।
राहत कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार संसाधन पहुंचा रहा है। जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों को क्षेत्र में स्थिति का लगातार जायजा लेने और जरूरत के अनुसार राहत सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
स्वास्थ्य, पशुधन और कृषि के लिए विशेष व्यवस्था:
बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए 71 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। चार बोट एम्बुलेंस के जरिए भी प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा पहुंचाई जा रही है। अब तक 37,649 लोगों का उपचार किया जा चुका है।
पशुधन के लिए 54 पशु कैंप लगाए गए हैं। इनमें अब तक 9,597 पशुओं का उपचार किया गया है। पशुपालकों को राहत देने के लिए 1,785.1 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है। कृषि क्षेत्र में बाढ़ से हुई क्षति का भी आकलन किया जा रहा है। वर्तमान आकलन के अनुसार 27,034 हेक्टेयर रकवा प्रभावित हुआ है। इनमें 33 प्रतिशत से अधिक क्षति वाला क्षेत्र 19,504 हेक्टेयर है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वच्छता और पेयजल की व्यवस्था भी की जा रही है। अब तक 137 अस्थाई शौचालय संचालित किए गए हैं और पेयजल के लिए 73 नए चापाकल लगाए गए हैं।जिला पदाधिकारी रिची पांडेय ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राहत और बचाव कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है। जरूरत के अनुसार नाव, भोजन, चिकित्सा, पेयजल, पशुचारा और अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। प्रशासन का प्रयास है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार तक आवश्यक सहायता समय पर पहुंचाई जाए।





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