आठ प्रखंडों में बाढ़ से 39,375 पशु प्रभावित, 46 पशु केंद्रों के माध्यम से लगातार चल रहा उपचार और चारा वितरण
बेगूसराय। 11 सितंबर। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
जिले में हाल के दिनों में आई बाढ़ ने इंसानों के साथ-साथ पशुओं के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जिले के आठ प्रखंड साम्हो, बछवाड़ा, मटिहानी, साहेबपुरकमाल, तेघड़ा, बरौनी, बेगूसराय और बलिया में बाढ़ का असर देखने को मिला है। बाढ़ के पानी के बीच पशुओं के रहने, खाने और पीने की व्यवस्था करना पशुपालकों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है।
ऐसे में की गई पड़ताल में सामने आए पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 9 सितंबर तक जिले में बाढ़ से प्रभावित पशुओं की संख्या 39,375 बताई गई है। प्रभावित पशुओं की देखभाल और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले में कुल 46 पशु केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
7,909 पशुओं का किया जा चुका है इलाज: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालन विभाग की टीम लगातार सक्रिय है। विभाग के अनुसार अब तक 7,909 पशुओं का इलाज किया जा चुका है। इसके अलावा प्रभावित पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए 7,909 पशुओं को कृमिनाशक दवा भी पिलाई जा चुकी है।
बाढ़ के दौरान पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती रहती है। पशुपालकों की इस परेशानी को देखते हुए विभाग की ओर से प्रभावित पशुओं के बीच अब तक 1,418.05 क्विंटल पशुचारा यानी भूसा वितरित किया गया है। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने में काफी मदद मिल रही है।
छह पशुओं की मौत की सूचना: पशुपालन विभाग के अनुसार, अब तक बाढ़ के कारण 6 पशुओं की मौत होने की सूचना है। विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि बीमारी या अन्य किसी कारण से पशुओं को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
पशुओं की देखभाल, उपचार, दवा वितरण, चारा उपलब्ध कराने और अन्य जरूरी कार्यों के लिए कुल 50 कर्मी दिन-रात क्षेत्र में लगे हुए हैं। ये कर्मी बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर पशुपालकों से जानकारी लेने के साथ-साथ जरूरत के अनुसार पशुओं को उपचार और दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
डीएम की निगरानी में चल रहा अभियान: इस संबंध में जिला पशुपालन पदाधिकारी राकेश कुमार कुमुद ने बताया कि जिलाधिकारी रिची पांडेय की देखरेख में पशुपालन विभाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की सेवा के लिए लगातार काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी स्वयं भी पशुओं से संबंधित राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।जिला पशुपालन पदाधिकारी राकेश कुमार कुमुद ने बताया कि विभाग की टीम लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर रही है और वहां चल रहे कार्यों की समीक्षा की जा रही है।
जिन क्षेत्रों में किसी तरह की कमी सामने आती है, वहां तत्काल आवश्यक सहायता और संसाधन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति के दौरान पशुओं को सुरक्षित रखना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में पशु चिकित्सा, दवा, कृमिनाशक दवा और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पशुपालकों को राहत पहुंचाने पर जोर: बाढ़ के कारण कई स्थानों पर पशुपालकों के सामने अपने पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने और उनके लिए पर्याप्त चारा-पानी की व्यवस्था करने की समस्या बनी हुई है। ऐसे में पशुपालन विभाग की ओर से संचालित पशु केंद्र और क्षेत्र में तैनात कर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विभाग का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा टीम और संसाधनों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है। साथ ही पशुपालकों को भी अपने पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जरूरी सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
फिलहाल जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग की निगरानी में राहत एवं पशु सेवा का यह अभियान लगातार जारी है। आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति के अनुसार पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा, दवा और चारे की उपलब्धता को और मजबूत करने पर विभाग का जोर है।






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