पूसा/समस्तीपुर, 29 मई 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
डा० राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा स्थित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केन्द्र द्वारा भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी मध्यावधि मौसम पूर्वानुमान में उत्तर बिहार के किसानों को अगले 48 घंटों तक वर्षा की संभावना को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार 30 मई से 3 जून 2026 तक कई जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना बनी रहेगी, जबकि इसके बाद मौसम सामान्यतः शुष्क रहने का अनुमान है।
तापमान और हवा की स्थिति: पूर्वानुमान के अनुसार इस अवधि में अधिकतम तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। वर्षा वाले क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। बाद के दिनों में पूर्वा हवा 8 से 12 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने की संभावना जताई गई है। सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 85 से 90 प्रतिशत तथा दोपहर में 35 से 40 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पिछले दिनों हुई अच्छी बारिशमौसमीय वेधशाला पूसा के अनुसार बीते तीन दिनों में औसतन 54.8 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
किसानों को दी गई विशेष सलाह: मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को मक्का की कटाई, दानों को सुखाने तथा मूंग की तैयार फसल की तुड़ाई मौसम को ध्यान में रखकर सावधानीपूर्वक करने की सलाह दी है। संभावित बारिश के कारण कृषि कार्यों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
खरीफ प्याज की नर्सरी तैयार करने की सलाह: किसानों को खरीफ प्याज की खेती के लिए नर्सरी तैयार करने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए एन-53, एग्रीफाउंड डार्क रेड, अकी कल्याण एवं भीमा सुपर जैसी किस्मों को उपयुक्त बताया गया है। बीजोपचार के बाद प्रमाणित बीजों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
धान की नर्सरी लगाने का उपयुक्त समय: कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि 10 जून तक लंबी अवधि वाली धान की किस्मों की नर्सरी डालने का उचित समय है। राजश्री, राजेन्द्र मंसूरी, राजेन्द्र स्वेता, स्वर्णा एवं स्वर्णा सब-1 जैसी किस्मों की बुआई की जा सकती है। अच्छी पौध के लिए खेत की समुचित तैयारी और गोबर की सड़ी खाद के प्रयोग की सलाह दी गई है।
खरीफ मक्का और अदरक की खेती की तैयारी: किसानों को खरीफ मक्का की बुआई के लिए खेत तैयार करने तथा गोबर की सड़ी खाद का उपयोग करने को कहा गया है। वहीं अदरक की खेती के लिए मरान एवं नदिया किस्मों को उपयुक्त बताया गया है। बीज उपचार कर बुआई करने तथा संतुलित उर्वरक प्रयोग की सलाह दी गई है।
पशुपालकों के लिए भी सुझाव: पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराने हेतु किसानों को व्यार, बाजरा और मक्का की बुआई करने की सलाह दी गई है। इसके साथ लोबिया एवं राइस बीन की अंतर्वर्ती खेती से चारे की गुणवत्ता बढ़ने की बात कही गई है।
यह जानकारी ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केन्द्र, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के नोडल पदाधिकारी डॉ० ए. सत्तार द्वारा जारी की गई।







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