सर्वे एजेंसी : 28 अगस्त 2025
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने के फैसले से भारत में आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इस निर्णय का असर न सिर्फ़ भारतीय निर्यात पर पड़ेगा बल्कि रोजगार और उत्पादन पर भी सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

डॉ. रजनी, डेंटिस्ट, बेगूसराय का मानना है कि टैरिफ बढ़ने से भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे। उन्होंने कहा—”जैसे कोई सामान जिसकी कीमत 100 रुपये है, वही अमेरिका में 150 रुपये में बिकेगा तो उसे कौन खरीदेगा? बिक्री घटने से खपत और उत्पादन दोनों कम होंगे और बेरोज़गारी बढ़ेगी। भारत को चाहिए कि वह केवल अमेरिका पर निर्भर न रहकर अन्य देशों पर भी ध्यान दे, जहाँ भारतीय सामान की बेहतर बिक्री हो सके।

राजीव रंजन, पूर्व उपमेयर, बेगूसराय निगम ने भारतीय उपभोक्ताओं से अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की। उन्होंने कहा—”भारतीय आदमी अमेरिकी प्रॉडक्ट खरीदना बंद कर दे, यही मांग है हम भारतवासियों से।”

सामाजिक कार्यकर्ता सरिता सुल्तानिया ने इस मुद्दे को कूटनीतिक और व्यावसायिक दोनों स्तरों से देखने की ज़रूरत बताई। उन्होंने कहा—”अमेरिका में भारतीय उत्पाद महंगे होने से उनकी डिमांड घटेगी और इसका असर सीधा निर्यातकों पर पड़ेगा। निर्यातकों को वैकल्पिक बाज़ार तलाशने होंगे। भारत सरकार को भी सहयोग करना होगा, ताकि नुकसान कम किया जा सके। विश्व व्यापार संगठन में अपील करने और नए बाज़ारों में प्रवेश करने के प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही घरेलू मांग बढ़ाने और उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने पर भी काम होना चाहिए।

“आर. के. सिन्हा, फैकल्टी ऑफ़ मैथमेटिक्स, बेगूसराय ने अमेरिका के फैसले को रूस से भारत द्वारा कच्चा तेल खरीदने से जोड़ते हुए कहा—”भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से नाराज़ होकर अमेरिका ने 50% टैरिफ लगा दिया है। इसका फायदा चीन, वियतनाम, कंबोडिया, फिलीपींस, बांग्लादेश जैसे देशों को मिलेगा। भारत सरकार को तुरंत छोटे व्यापारियों और लघु उद्योगों को आर्थिक मदद, सस्ते कर्ज और आसान क्रेडिट देना चाहिए। साथ ही यूरोपीय देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करना होगा और ‘मेड इन इंडिया’ को बढ़ावा देना होगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत सही समय पर वैकल्पिक बाज़ारों और कूटनीतिक बातचीत पर ध्यान नहीं देता, तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर देखने को मिलेगा।







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