प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने कहा—आयुर्वेद शाश्वत है, धरती पर सदैव रहेगा इसका महत्व
बेगूसराय। 6 नवंबर 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
राजकीय अयोध्या शिवकुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय, बेगूसराय में शुक्रवार को भगवान धन्वंतरि की जयंती श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में भगवान धन्वंतरि की विधिवत पूजा-अर्चना एवं हवन का आयोजन किया गया।
पूजा में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी यजमान के रूप में शामिल हुए। वहीं, संस्कृत के विद्वान पंडित नवल किशोर मिश्रा ने पुरोहित की भूमिका निभाते हुए विधि-विधान से पूजन एवं हवन संपन्न कराया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य और आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवासुर संग्राम के पश्चात हुए समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। उनके नाम पर धन्वंतरि संप्रदाय की परंपरा विकसित हुई, जिसके अनेक विद्वानों और महापुरुषों ने आयुर्वेद के विभिन्न ग्रंथों की रचना कर इस चिकित्सा पद्धति को समृद्ध बनाया।
उन्होंने कहा कि भगवान धन्वंतरि एवं आयुर्वेद के मनीषियों द्वारा बताए गए औषधीय द्रव्य और उनके उपयोग की परंपरा आज भी प्रासंगिक है। आयुर्वेद एक शाश्वत चिकित्सा पद्धति है, जिसका महत्व धरती पर हमेशा बना रहेगा।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के उपाधीक्षक डॉ. दिलीप कुमार वर्मा, पूर्ववर्ती छात्र समिति के अध्यक्ष डॉ. लाल कौशल कुमार, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. रमन रंजन, डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह, डॉ. अखिलेश जायसवाल, डॉ. राजीव कुमार शर्मा, डॉ. रामनंदन साहनी, डॉ. शंभू कुमार, डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह, डॉ. इंदु कुमारी, डॉ. उर्वशी सिन्हा, डॉ. रामसागर दास, डॉ. सुल्ताना परवीन, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. आनंद मिश्रा, डॉ. मनीष कुमार आलोक एवं डॉ. नंद कुमार साहनी सहित महाविद्यालय के अन्य चिकित्सक एवं कर्मी उपस्थित रहे।
समारोह का माहौल भक्तिमय रहा। सभी ने भगवान धन्वंतरि से आरोग्य, सुख-समृद्धि और स्वस्थ जीवन की कामना की।





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