बेगूसराय | 25 अक्टूबर 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
जनवादी लेखक संघ, जिला इकाई बेगूसराय की ओर से रविवार को युवा साहित्यकार एवं संगठन के कार्यकारिणी सदस्य मुकेश कुमार के काव्य संग्रह ‘प्रेम पीयूष’ और कहानी संग्रह ‘संस्कार’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर दोनों पुस्तकों को केंद्र में रखकर ‘प्रेम पीयूष और संस्कार में समाज’ विषय पर साहित्यिक परिचर्चा भी आयोजित की गई। कार्यक्रम स्थानीय बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के कर्मयोगी सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनवादी लेखक संघ के जिला अध्यक्ष एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के अवकाशप्राप्त हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र साह ने की, जबकि संचालन जिला सचिव राजेश कुमार ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत आसिफा खातून, सायरा बानो, फातिमा प्रवीण और अलीशा खातून के स्वागत गान तथा मुकेश कुमार की दो कविताओं के सस्वर पाठ से हुई। इसके बाद मुकेश कुमार और कनक कुमारी ने अतिथियों को शॉल देकर सम्मानित किया। साहित्यकार मुकेश कुमार ने अपनी रचना प्रक्रिया से जुड़े अनुभव भी साझा किए।
साहित्य में समाज और मानवीय संवेदनाओं का चित्रण: परिचर्चा में विषय प्रवेश कराते हुए जनवादी लेखक संघ के जिला उपाध्यक्ष डॉ. चन्द्रशेखर चौरसिया ने कहा कि मुकेश कुमार की रचनाओं में व्यक्त स्वप्न और चिंताएं वास्तविक जीवन से जुड़ी हैं। वहीं, संगठन के उप सचिव एवं बीएसएस कॉलेजिएट इंटर कॉलेज, बेगूसराय के हिन्दी प्रवक्ता डॉ. निरंजन कुमार ने कहा कि उनकी रचनाएं पठनीय और विचारणीय हैं। रंगकर्मी रवि रंजन ने मुकेश कुमार की रचनाओं में सामाजिक सरोकारों के विविध पक्षों की चर्चा की। जन संस्कृति मंच के राज्य सचिव दीपक सिन्हा ने कहा कि उनके साहित्य में समाज और ग्रामीण जीवन की वास्तविकताएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
नगर निगम बेगूसराय की जनप्रतिनिधि एवं युवा साहित्यकार डॉ. शगुफ्ता ताजवर ने कहानी ‘संस्कार’ में बदलते परिवेश के बीच बेटियों के साहस और ‘संगम’ में परिवार की विभिन्न पीढ़ियों के बीच संबंधों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन रचनाओं से समाज में एकजुटता का संदेश मिलता है।
चुनौतीपूर्ण समय में साहित्य की भूमिका पर जोर: जनवादी लेखक संघ के राज्य सचिव कुमार विनीताभ ने कहा कि वर्तमान दौर में राजनीति, समाज और संस्कृति के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं। ऐसे समय में नई पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता से जुड़ी चुनौतियों, युवाओं एवं महिलाओं के उत्पीड़न और सामाजिक समस्याओं को मुकेश कुमार ने अपनी रचनाओं में संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है।ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. चन्द्र भानु प्रसाद सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में अमानवीकरण की प्रक्रिया चिंता का विषय है। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में मुकेश कुमार की रचनाओं में मानवतावाद और इंसानियत की तलाश दिखाई देती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राजेन्द्र साह ने कहा कि सफल साहित्यकार वही है, जिसकी भाषा सरल, सहज और सुबोध हो। इस दृष्टि से मुकेश कुमार एक सफल रचनाकार हैं। परिचर्चा के दौरान प्रो. रवीन्द्र ठाकुर, प्रभा कुमारी, प्रो. जिक्रुल्लाह खान, राजाराम साह, उपेन्द्र राम, सुबैर आलम, नरेंद्र कुमार सिंह, स्वाति गोदर और चंदन वत्स सहित कई साहित्यकारों ने अपने विचार रखे और विषय को समृद्ध किया।कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी उमेश राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर रामाशीष राय, दीपक कुमार, कमल वत्स, रामनरेश सिंह, मोहन कुमार, संतोष कुमार, राजकिशोर सिंह, विजय कुमार चौधरी, रामसेवक चौधरी, जीवेश कुमार, जयदेव महतो सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।





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