महिला समानता दिवस विशेष : 26 अगस्त। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बेगूसराय बिहार की पूर्व प्राचार्या केंद्रीय विद्यालय सह अधिवक्ता सीता देवी ने अपने विचार बताते हुए कहा कि महिला समानता दिवस के अवसर पर महिलाओं को वास्तविक समानता दिलाने के लिए परिवार, समाज और सरकार की साझा भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्या एवं अधिवक्ता सीता देवी ने कहा कि समानता केवल कानूनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि परिवार और समाज के व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार में लड़के और लड़की का समान पालन-पोषण, घरेलू कार्यों का समान बंटवारा तथा महिलाओं को करियर और जीवन से जुड़े निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। वहीं समाज को पितृसत्तात्मक मानसिकता में बदलाव लाते हुए महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना होगा। कार्यस्थलों पर बिना लैंगिक भेदभाव के समान अवसर और समान वेतन सुनिश्चित किया जाना भी जरूरी है।सीता देवी ने सरकार की भूमिका पर कहा कि महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों का प्रभावी और कड़ा पालन होना चाहिए। राजनीति में महिलाओं की 33 प्रतिशत सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल आवश्यक है।
उन्होंने महिला समानता को वास्तविक रूप देने के लिए तीन प्रमुख बदलावों पर जोर दिया। पहला, आर्थिक आत्मनिर्भरता और संपत्ति का अधिकार—महिलाओं को समान शिक्षा, रोजगार के अवसर और पारिवारिक संपत्ति में वास्तविक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। दूसरा, भयमुक्त वातावरण और त्वरित न्याय—सार्वजनिक और निजी दोनों स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो तथा महिला अपराधों के मामलों में फास्ट-ट्रैक न्याय व्यवस्था के माध्यम से प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई हो। तीसरा, घरेलू कार्यों का समान विभाजन—घर और देखभाल से जुड़े कार्यों को केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं माना जाना चाहिए। परिवार के सभी सदस्यों को अपनी जिम्मेदारी समान रूप से निभानी चाहिए।
सीता देवी, अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्या, केंद्रीय विद्यालयअधिवक्ता, व्यवहार न्यायालय, बेगूसराय




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