महिला समानता दिवस पर विशेष। 26 अगस्त। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
सारिका भास्कर, समाज सेविका, बेगूसराय ने महिला. समानता दिवस पर महिला कि समानता विषय को लेकर तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए बताया कि
One should challenge gender stereotypes at schools and home-
1. Pink is a girly color– the truth is, it’s just a color. 2.Girls play with dolls whereas boys play with cars- the truth is, toys are not gender specific. 3.Boys donot cry- the truth is, crying doesnot mean you are weak. 4.Teaching about consent is vulgar- the truth is, teaching about consent is a bare minimum. 5.Feminism is for women – the truth is, being a feminist is a basic manner.
हिंदी रूपांतर :
गुलाबी रंग लड़कियों का रंग है — सच यह है कि रंगों का कोई जेंडर नहीं होता।
लड़कियाँ गुड़ियों से और लड़के कारों से खेलते हैं — सच यह है कि खिलौने किसी जेंडर के लिए निर्धारित नहीं होते।
लड़के रोते नहीं हैं — सच यह है कि रोना कमजोरी की निशानी नहीं है।
बच्चों को सहमति (Consent) के बारे में सिखाना अश्लील है — सच यह है कि सहमति के बारे में सही शिक्षा देना बेहद जरूरी और बुनियादी आवश्यकता है।
फेमिनिज़्म सिर्फ महिलाओं के लिए है — सच यह है कि महिला-पुरुष समानता में विश्वास करना एक बुनियादी मानवीय सोच और व्यवहार है।
मुख्य संदेश:
स्कूल और घर—दोनों जगह लैंगिक रूढ़िवादिता (Gender Stereotypes) को चुनौती देना जरूरी है।





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