महिला समानता दिवस पर विशेष : 26 अगस्त 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
महिला समानता दिवस के अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली की अधिवक्ता भारती कुमारी ने महिलाओं को वास्तविक समानता दिलाने के लिए समान वेतन, बिना भेदभाव के अवसर और निर्णय लेने की स्वतंत्रता को जरूरी बताया है।भारती कुमारी ने कहा कि हर क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों के समान वेतन और बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। महिलाओं की प्रतिभा और क्षमता को लिंग के आधार पर सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवारों को भी बेटियों के करियर और वित्तीय फैसलों में बिना किसी बंदिश के उनका समर्थन करना चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने भविष्य को लेकर स्वतंत्र निर्णय ले सकें।
उन्होंने स्कूली पाठ्यक्रम में जेंडर संवेदीकरण (Gender Sensitization) को अनिवार्य रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि बचपन से ही बच्चों में लैंगिक समानता, सम्मान और समान अधिकारों की समझ विकसित की जाए, तो समाज में लंबे समय से चली आ रही भेदभावपूर्ण सोच को बदला जा सकता है।
भारती कुमारी ने कहा कि समाज और सरकार को मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जहां महिलाएं अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं ले सकें। शिक्षा, रोजगार, विवाह, करियर, आर्थिक स्वतंत्रता और अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों में महिलाओं की स्वतंत्रता और उनकी पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि महिला समानता केवल कानून बनाने से संभव नहीं होगी, बल्कि इसके लिए परिवार की सोच, सामाजिक व्यवस्था और संस्थागत नीतियों में भी बदलाव जरूरी है। जब महिलाओं को समान अवसर, समान वेतन और अपने जीवन के फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलेगी, तभी वास्तविक समानता का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
भारती कुमारी, अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली






Total views : 102189