15 सूत्री मांगों को लेकर प्राचार्य कक्ष का घेराव, विश्वविद्यालय प्रशासन पर समझौता लागू नहीं करने का आरोप
बेगूसराय, 07 मई 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय कर्मचारी प्रक्षेत्रीय संघ, दरभंगा तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर एसबीएसएस कॉलेज बेगूसराय में शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने दो दिवसीय कलमबंद हड़ताल की। यह हड़ताल 6 एवं 7 मई 2026 को आयोजित की गई। कर्मचारियों ने अपनी 15 सूत्री लंबित मांगों को लागू कराने के लिए कार्य बहिष्कार करते हुए प्राचार्य कक्ष का घेराव किया। आंदोलन का नेतृत्व इकाई संघ के अध्यक्ष मो. अजमल एवं सचिव डॉ. मुकेश कुमार ने किया।
समझौते के बावजूद मांगें लागू नहीं होने का आरोप: इकाई अध्यक्ष मो. अजमल ने बताया कि 14 अक्टूबर 2024 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी मांगों को लिखित समझौते के माध्यम से स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब तक उसका अनुपालन नहीं किया गया है। इसी कारण कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने पहले भी अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन किया था। 10 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक प्रतिदिन अपराह्न 1:30 बजे से 2:00 बजे तक प्रधानाचार्य कार्यालय का घेराव कर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया था।
शिक्षक संघ ने भी दिया समर्थन: शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के आंदोलन को कॉलेज शिक्षक संघ का भी समर्थन मिला। इकाई शिक्षक संघ के सचिव एवं एलएन मूटा के महासचिव डॉ. नीलेश कुमार, उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार, डॉ. मो. परवेज, डॉ. गोबिंद पासवान, डॉ. विवेक कुमार सिन्हा और डॉ. विद्यासागर सहित कई शिक्षकों ने कलमबंद हड़ताल के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समर्थन देने वाले शिक्षकों ने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए और जल्द समाधान निकालना चाहिए।
बड़ी संख्या में कर्मचारी रहे मौजूद: हड़ताल एवं घेराव कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें धीरज कुमार, राजीव कुमार, कुमार गौरव, स्वाती कुमारी, अरुण मालाकार, रामसेवक कुमार, कुंदन कुमार, अनिल पोद्दार, सलित कुमार झा, कारी सिंह, भानू चौधरी, समीर कुमार, मोहम्मद अजमल और अमित कुमार सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी: कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द उनकी मांगों को लागू नहीं करता है, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।






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