बेगूसराय | 14 जनवरी 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बेगूसराय प्रखंड सभागार में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के बैनर तले 100 दिवसीय अभियान – “बाल विवाह मुक्त भारत” को सफल बनाने हेतु सेविका, सहायिका एवं आशा कार्यकर्ताओं के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आगत अतिथियों के स्वागत एवं विषय प्रवेश के साथ हुआ।
सामुदायिक स्तर पर कानूनी जागरूकता पर जोर: प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए प्रभारी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कुमारी आशालता ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार चल रहे इस अभियान का उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर कानूनी समझ विकसित करना है, ताकि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को जड़ से समाप्त किया जा सके। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से प्रशिक्षण के माध्यम से मिली जानकारी समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाने का आह्वान किया।
बाल विवाह एक गंभीर कानूनी अपराध: मुख्य अतिथि एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह न्यायाधीश करुणानिधि प्रसाद आर्य ने कहा कि बाल विवाह हमारे समाज के लिए एक गंभीर अभिशाप है, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है, जिसमें दोषियों को दो वर्ष तक की जेल, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
सभी सहभागी भी होंगे दोषी: न्यायाधीश आर्य ने बताया कि बाल विवाह के मामलों में केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि टेंट संचालक, हलवाई, पंडित एवं आयोजन से जुड़े अन्य लोग भी दोषी माने जाएंगे। उन्होंने अपील की कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत स्थानीय थाना, प्रखंड विकास पदाधिकारी या जिला प्रशासन को सूचित करें। साथ ही टोल फ्री नंबर 15100 एवं 1098 पर कॉल कर जानकारी दें।
विशेषज्ञों ने भी रखे विचार: कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता विवेक कुमार सिन्हा, सुबोध कुमार झा, पीएलवी अरविंद कुमार, वैशाली समाज कल्याण संस्थान के सपोर्ट पर्सन राजमणी रंजन, सामुदायिक कार्यकर्ता सरिता कुमारी तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार से शैलेश कुमार ने भी प्रशिक्षण सत्र में अपने विचार साझा किए।







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