शहर के ऐतिहासिक बड़ी पोखर चित्रगुप्त मंदिर में हुआ भव्य आयोजन, हजारों चित्रांशों ने की पूजा-अर्चना
नेशनल पॉजिटिव न्यूज़ | बेगूसराय | 23 अक्टूबर 2025
बेगूसराय में आज कायस्थ समाज के आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त की पूजा पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। शहर से लेकर गांव तक चित्रांश समाज के लोगों ने घरों और मंदिरों में भगवान चित्रगुप्त की विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्य आयोजन शहर के मध्य बड़ी पोखर स्थित श्री चित्रगुप्त मंदिर में हुआ, जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए और सामूहिक पूजा में भाग लिया। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगिता और वाद-विवाद जैसे आयोजन हुए, जिनमें बच्चों और बड़ों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए गए। देर शाम सामूहिक भोज का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में चित्रांश परिवारों ने भाग लिया। मंदिर समिति के अध्यक्ष कौशल किशोर वर्मा, महामंत्री सुनील सिन्हा और संयोजक मृत्युंजय कुमार सिन्हा ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी चित्रगुप्त पूजा पूरे उल्लास से संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि यह परंपरा सदैव जारी रहेगी। मौके पर रत्नेश सिन्हा, ज्ञानप्रकाश सिन्हा, कुमुद किशोर प्रसाद, दिलीप सिन्हा, सच्चिदान्द प्रेम, संजीव कुमार, अमित कुमार, राजीव कुमार, शंकर वर्मा, गुड्डू वर्मा, मनोज कुमार सिन्हा, धीरेन्द्र कुमार, उमेश वर्मा, चन्दन सोनू, रमन सिन्हा, ज्योति सिन्हा आदि उपस्थित थे।
लोहियानगर में भी भव्य आयोजन: लोहियानगर स्थित चित्रगुप्त मंदिर में भी पूजा उत्साहपूर्वक संपन्न हुई। आयोजन समिति के प्रमोद कुमार सोनू, जया श्रीवास्तव, संदीप सिन्हा, जयंती सिन्हा, राजन सिन्हा, प्रकाश कुमार सिन्हा, आकाश कुमार सिन्हा, मुन्ना सिन्हा और अमन कुमार समेत अन्य सदस्य दिनभर पूजा की तैयारियों में जुटे रहे।

📜 ऐतिहासिक धरोहर: बड़ी पोखर का चित्रगुप्त मंदिर
बेगूसराय शहर के बीचोंबीच स्थित बड़ी पोखर चित्रगुप्त मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मंदिर के अध्यक्ष कौशल किशोर वर्मा के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण सन् 1886 में किया गया था। यहाँ स्थापित भगवान चित्रगुप्त की मूर्ति पाल वंश काल की मानी जाती है, जो वीरपुर नौलागढ़ के उत्खनन में सन् 1846 में प्राप्त हुई थी।महामंत्री सुनील कुमार सिन्हा ने बताया कि मंदिर का उल्लेख भारत सरकार के 1902 के खतियान सर्वेक्षण में भी मिलता है। बाद में चेरियाबरियारपुर निवासी प्रिक्षा कुमारी ने इस मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।इतिहासकार स्व. अविनाश चंद्र वर्मा ने भी इस मूर्ति के पालकालीन होने की पुष्टि की थी। मंदिर परिसर में शिव मंदिर, हनुमान मंदिर और अन्य पूजा स्थल भी हैं। कार्तिक मास में चित्रगुप्त पूजा से लेकर छठ पर्व तक यहाँ मेला लगता है, जो स्थानीय आकर्षण का केंद्र रहता है।स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार पहल करे तो इस मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
🕉️ सारांश:
कायस्थ समाज द्वारा भगवान चित्रगुप्त की पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी संदेश देती है। बेगूसराय का बड़ी पोखर मंदिर इस परंपरा का साक्षी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक गौरवशाली धरोहर बना रहेगा।






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