बेगूसराय /मटिहानी, 10 सितम्बर। 2025
महागठबंधन की ओर से माकपा, राजद, कांग्रेस एवं भाकपा के संयुक्त तत्वावधान में मटिहानी प्रखंड कार्यालय के समक्ष जी.आर. राशि से वंचित बाढ़ पीड़ितों का आक्रोशपूर्ण धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। धरना में प्रमुख मांग रखी गई कि लगातार सूखा, बाढ़ और कसोह (सिपेज) से तबाह मटिहानी प्रखंड को अकाल क्षेत्र घोषित किया जाए। साथ ही जी.आर. राशि की सूची की हार्ड कॉपी प्रखंड अनुश्रवण समिति के सदस्यों को उपलब्ध कराने, बाढ़ पीड़ितों के बीच पारदर्शी तरीके से राशि वितरण सुनिश्चित करने और इनपुट आवेदन प्रक्रिया में व्याप्त धांधली पर रोक लगाने की मांग उठाई गई। वर्ष 2024 की बाढ़ के दौरान संचालित सामुदायिक रसोई केन्द्र एवं नाव परिचालन के बकाए भुगतान सहित कई अन्य मुद्दों को भी धरना में प्रमुखता से रखा गया।
धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता राजद प्रखंड अध्यक्ष कैलाश यादव, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष रामानुज कुमार, सीपीआई नेता महेंद्र यादव एवं माकपा लोकल सचिव वकील राम की चार सदस्यीय अध्यक्ष मंडली ने की। संचालन पूर्व कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष रामचंद्र सिंह ने किया।
नेताओं ने साधा सरकार पर निशाना: माकपा नेता एवं जिला पार्षद अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि “डबल इंजन सरकार में प्रशासन पूरी तरह भ्रष्ट और निरंकुश हो चुका है। लगभग 40% बाढ़ पीड़ित परिवार आज भी जी.आर. राशि से वंचित हैं। यदि 15 दिनों के भीतर सभी वंचित परिवारों को भुगतान नहीं किया गया तो सड़क जाम आंदोलन और जरूरत पड़ने पर न्यायालय की शरण ली जाएगी।”कांग्रेस नेता सुबोध कुमार सिंह ने एनडीए सरकार और मटिहानी विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जनता को गुमराह कर विकास के नाम पर धोखा दिया जा रहा है।”
कई नेताओं ने किया संबोधित: धरना को कांग्रेस नेता रामचंद्र सिंह, अशोक राय, मो. मतीन, पैक्स अध्यक्ष राहुल कुमार, सरपंच अशोक झा, नेता बम बम सिंह, पवन पोद्दार, महेश यादव, अशोक ठाकुर, सुधीर यादव, माकपा नेता नवल किशोर सिंह, प्रमोद साह, उपेन्द्र शर्मा, मुरारी पोद्दार, मनोहर सिंह एवं अजय कुमार सिंह सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
प्रशासन ने दिया आश्वासन: धरना स्थल पर पहुंचे प्रखंड विकास पदाधिकारी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने महागठबंधन नेताओं को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई होगी। इसके बाद फिलहाल आंदोलन को स्थगित कर 15 दिनों की समय सीमा तय की गई है। यदि निर्धारित अवधि में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।





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