बेगूसराय, 24 अक्टूबर (नेशनल पॉजिटिव न्यूज़)।
लोक आस्था का महान पर्व छठ कल से आरंभ हो रहा है। यह चार दिवसीय पर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक श्रद्धा, भक्ति और तप का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। कल नहाय-खाय के साथ इसकी शुरुआत होगी, जिसमें व्रती महिलाएं गंगा या पवित्र नदी-तालाब में स्नान कर पवित्रता का संकल्प लेंगी और कद्दू-भात ग्रहण करेंगी। यही छठ महापर्व की शुभ शुरुआत मानी जाती है।

🌞 चार दिनों का कार्यक्रम 👉 पहला दिन – नहाय-खाय (25 अक्टूबर): व्रती महिलाएं स्नान कर घर की शुद्धि करती हैं। भगवान भास्कर और छठी मइया की पूजा कर कद्दू-भात, चने की दाल और अरवा चावल ग्रहण किया जाता है। 👉 दूसरा दिन – खरना (26 अक्टूबर): इस दिन पूरे दिन निराहार रहने के बाद शाम को व्रती गुड़ और चावल की खीर, रोटी और केला से प्रसाद बनाकर पूजा करती हैं। 👉 तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर): व्रती महिलाएं सूर्यास्त के समय अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देती हैं। घाटों पर पारंपरिक गीतों और भजनों के साथ श्रद्धा की लहर उमड़ पड़ती है। 👉 चौथा दिन – उषा अर्घ्य (28 अक्टूबर): अंतिम दिन प्रातः काल उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसके साथ ही चार दिन का यह पावन व्रत पूर्ण होता है।
छठ पर्व में विशेष अर्घ्य-समय : सूर्योदय-सूर्यास्त का महत्व
बिहार। लोक आस्था व परंपरा का महान पर्व छठ कल से आरंभ हो रहा है। चार दिवसीय इस व्रत-यात्रा के भोजन-पूजा-अर्घ्य के प्रत्येक चरण को विशिष्ट समय में संपन्न करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से, संध्या अर्घ्य और उषा-अर्घ्य के लिए नीचे दिए गए सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुमानित समय से व्रती और पूजा-समिति बेहतर तैयारी कर सकती हैं।
📍 अनुमानित समय (स्थान : बेगूसराय, बिहार)
संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त-समय): लगभग 5:10 PM के लगभग।
उषा अर्घ्य (सूर्योदय-समय): अगले सुबह लगभग 5:49 AM के आसपास।
🛕 इस समय का धार्मिक अर्थ
संध्या अर्घ्य का समय — जब अस्त हो रहा सूर्य-देव को अर्घ्य देकर व्रती अपनी श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इस समय नदी-घाट पर गूंजते पारंपरिक गीत-भजन, दीप-दान और भक्तिभाव मनोरम दृश्य बनाते हैं।
उषा अर्घ्य का समय — दिन के प्रारंभ में उगते सूर्य-देव को अर्घ्य कर व्रती नए प्रारंभ, शुद्धि और उल्लास का संकल्प लेते हैं। यह समय विशेष रूप से पवित्र माना जाता है।
🔖 तैयारी के सुझाव
घाट पहुंचे समय से पहले तैयारी करना उचित रहेगा — दीप-मालाएँ, नारियल-फूल, पवित्र जल आदि साथ रखें।
सूर्योदय के समय हेतु सुबह जल्दी उठें और घाट पर स्थान सुनिश्चित करें।
सूर्यास्त के समय हेतु सुरक्षित-प्रशासित घाट चयन करें तथा भीड़ के समय सावधानी रखें।
मोबाइल-फ़ोन, कैमरा आदि साथ लेने से घाट-पर्व के दृश्य सुरक्षित रूप से कैद किये जा सकते हैं।
💬 प्रेरणादायक संदेश
“सूर्योदय-सूर्यास्त का यह पवित्र पल हमें सिखाता है — समय की पावनता, कर्म की शुद्धि, और जीवन में स्थिरता का महत्व।”
🌸 लोक आस्था और भावनाओं का पर्वछठ पर्व केवल पूजा नहीं बल्कि संयम, श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व है। इस दौरान महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और शुद्धता का विशेष ध्यान रखती हैं। घाटों पर सजावट, गीत-संगीत और लोक भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
💬 प्रेरणादायक संदेश : छठ व्रत हमें सिखाता है कि धैर्य, विश्वास और सेवा भावना से हर कठिनाई पर विजय पाई जा सकती है।यह पर्व भारतीय संस्कृति की गहराई और लोक आस्था की शक्ति का जीवंत प्रतीक है।






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