बेगूसराय, 09 मार्च 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बेगूसराय स्थित दिनकर कला भवन प्रेक्षागृह में रंगसृजन आर्ट एंड सोशल एसोसिएशन द्वारा देश के प्रसिद्ध नाटककार विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित चर्चित नाटक “कन्यादान” का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन चर्चित युवा रंगकर्मी सचिन कुमार ने किया। नाटक का मुख्य विषय स्त्री विमर्श और दलित चिंतन पर आधारित था, जिसने दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया।

कलाकारों के दमदार अभिनय ने बांधा समा: नाटक में नाथ देवलालीकर की भूमिका में अमन शर्मा ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। सेवा की भूमिका में ईशा ने जीवन की व्यावहारिकता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं दलित पात्र अरुण आठवले की भूमिका में मृणाल गौतम और उनकी पत्नी ज्योति के किरदार में रिया कुमारी ने अपने उत्कृष्ट अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा जयप्रकाश की भूमिका में नवीन कुमार, वामन सेठ की भूमिका में सौरभ कुमार तथा हमीर राव के किरदार में रितेश कुमार ने भी शानदार अभिनय कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरी।

तकनीकी टीम का भी रहा महत्वपूर्ण योगदान: नाटक की प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन मोहित मोहन ने किया, जबकि इलेक्ट्रॉनिक संगीत की परिकल्पना और संचालन सौरभ कुमार द्वारा किया गया। वस्त्र विन्यास और रूप सज्जा डॉली कुमारी ने संभाली। मंच निर्माण एवं प्रेक्षागृह व्यवस्था में राजकुमार, विकास कुमार, बादल कुमार और सौरभ कुमार का योगदान रहा। पोस्टर-बैनर डिजाइन सनोज शर्मा तथा तकनीकी व्यवस्था पंकज सिन्हा के जिम्मे थी। कार्यक्रम का मंच संचालन प्राची आर्यन ने किया, जबकि संचालन सहयोग में सृजन सिन्हा, यशना भूषण और अग्रिमा भूषण मौजूद थीं।

सामाजिक वास्तविकताओं पर सवाल उठाता है नाटक: नाटक की कहानी एक प्रगतिशील दलित-समर्थक नेता नाथ देवलालीकर के परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। वे सामाजिक समानता और जाति-भेद मिटाने के प्रबल समर्थक हैं। उनकी बेटी ज्योति एक दलित कवि अरुण आठवले की कविताओं से प्रभावित होकर उससे विवाह करने का निर्णय लेती है। नाथ देवलालीकर अपने सिद्धांतों के कारण इस विवाह का समर्थन करते हैं और इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में एक कदम मानते हैं। हालांकि ज्योति की मां सेवा अपनी बेटी को जीवन की वास्तविकताओं से अवगत कराती है, लेकिन ज्योति अपने पिता के आदर्शों और सिद्धांतों को अधिक महत्व देती है। विवाह के बाद उसे अरुण के साथ जीवन में हिंसा, अपमान और कठोर व्यवहार का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार नाटक यह सवाल उठाता है कि क्या केवल आदर्शवादी सिद्धांतों के आधार पर सामाजिक परिवर्तन संभव है, या वास्तविक जीवन की जटिलताएं कहीं अधिक गहरी होती हैं।
दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का हुआ उद्घाटन: कार्यक्रम का उद्घाटन नगर निगम की मेयर पिंकी देवी, पूर्व विधायक राजकुमार सिंह, कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने किया। मौके पर पूर्व मेयर संजय सिंह, महिला भाजपा जिला अध्यक्ष रेखा कुमारी, वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल पतंग, अवधेश सिन्हा, दीपक सिन्हा, प्रदीप बिहारी, प्रमोद मनवंश, वार्ड पार्षद शगुफ्ता ताजवर, अशोक सिन्हा, दिलीप सिन्हा, संस्था के सचिव भास्कर भूषण तथा संस्था की सक्रिय सदस्य सारिका भास्कर, रंगकर्मी परवेज युसूफ, अंकिता कुमारी, कुंदन सिन्हा, कुमार अभिजीत मुन्ना, किशोरी मिश्रा, हरि किशोर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।







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