नई दिल्ली। 29 जनवरी 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के उद्देश्य से यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा जारी किए गए नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि ‘UGC Promotion of Equity Regulations 2026’ के प्रावधानों में प्रथम दृष्टया अस्पष्टता है और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्यों लगाई गई रोक?: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि नियमों की भाषा और प्रक्रियाएं स्पष्ट नहीं हैं। इससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में मनमाने ढंग से कार्रवाई की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने इन नियमों के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगाने का आदेश दिया।
विशेषज्ञ समिति के गठन का सुझाव: कोर्ट ने यह भी कहा कि इन नियमों में सुधार की गुंजाइश है। इसके लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जा सकती है, जो नियमों की समीक्षा कर उनमें मौजूद खामियों को दूर करने पर विचार करे। कोर्ट का मानना है कि बिना स्पष्टता के ऐसे नियम लागू करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है।
क्या है UGC विवाद का मूल मुद्दा?: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” नाम से नए नियम 13 जनवरी 2026 को लागू किए थे, जिनका लक्ष्य उच्च शिक्षा में भेदभाव रोकना और ‘इक्विटी कमेटी’ बनाना था। इन नियमों में विशेष रूप से SC, ST और OBC छात्रों के लिए शिकायत निवारण प्रणाली का प्रावधान है।
📣 क्यों इस पर विरोध हो रहा है?व्यापक विरोध प्रदर्शन : छात्रों और कुछ सामाजिक समूहों ने कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किए। विरोधी तर्क दे रहे हैं कि नियम अस्पष्ट, विभाजनकारी और सामान्य श्रेणी (General category) के छात्रों के खिलाफ हैं। �The Times of India‘
Equity Committee’ और शिकायत प्रक्रिया:कमेटियों में आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य करने को कुछ लोग अन्य छात्रों के अधिकारों के लिए खतरा बता रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक मामला: विरोध के बीच इस विवाद को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, और कोर्ट ने नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2026 के इक्विटी नियमों पर स्थगन (Stay) आदेश दिया है और कहा है कि 2012 के पुराने नियम अब भी लागू रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि नए नियम स्पष्ट नहीं और गलत इस्तेमाल के लिए संवेदनशील दिखते हैं। अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
🗣️ विरोध पक्ष के मुख्य तर्क: कुछ छात्रों और संगठनों का कहना है कि नियम विधि के नियमों से ऊपर जा रहे हैं और इससे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता और न्यायिक समानता के सिद्धांत पर असर पड़ेगा।
विरोधियों का आरोप है कि नियम भेदभाव के दावे को कुछ समूहों तक सीमित रखकर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को अलग कर देंगे, जो संविधान के बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ है।







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