नेशनल पॉजिटिव न्यूज़। दिनांक: 29 मार्च 2026
बेगूसराय/पटना:बिहार ग्रामीण जागरूकता अभियान समिति के कार्यपालक निदेशक इंजीनियर कौशलेंद्र कुमार ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 एवं 2026 के प्रस्तावित संशोधनों को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान प्रावधानों को पूर्ववत रखते हुए समुदाय की राय को शामिल किया जाए।
आत्म-पहचान के अधिकार पर सवाल: इंजीनियर कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि नया कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के आत्म-पहचान के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने 2014 के सुप्रीम कोर्ट के NALSA फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी लैंगिक पहचान तय करने का अधिकार है। लेकिन नए प्रावधान के तहत पहचान के लिए जिला मजिस्ट्रेट से प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य किया गया है, जिसे उन्होंने निजता और गरिमा के खिलाफ बताया।
सर्जरी की अनिवार्यता पर आपत्ति: उन्होंने कानून में ‘पुरुष’ या ‘महिला’ के रूप में पहचान बदलने के लिए लिंग परिवर्तन सर्जरी के प्रमाण की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाया।उनका कहना है कि जेंडर केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक पहचान भी है। ऐसे में सर्जरी को अनिवार्य बनाना समुदाय के कई लोगों के अधिकारों का हनन है।
सजा में भेदभाव का आरोप: कौशलेंद्र कुमार ने कानून में सजा के प्रावधानों को भी भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जहां महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों पर कड़ी सजा है, वहीं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ समान अपराधों में केवल 6 महीने से 2 साल तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने इसे ट्रांसजेंडर समुदाय के जीवन और सुरक्षा के साथ अन्याय करार दिया।
समुदाय के साथ रहने के अधिकार पर चिंता: पत्र में यह भी कहा गया है कि कई ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को परिवार से हिंसा झेलनी पड़ती है। ऐसे में उन्हें अपनी पसंद के समुदाय (जैसे हिजड़ा या अरावनी समुदाय) के साथ रहने का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन नए प्रावधान इसे सीमित करते हैं।
आरक्षण का अभाव भी मुद्दा: उन्होंने यह भी उठाया कि कानून में शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर समुदाय को पिछड़ा वर्ग के रूप में आरक्षण देने की सिफारिश की थी।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग: इंजीनियर कौशलेंद्र कुमार ने इन सभी मुद्दों को गंभीर बताते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने और कानून में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की रक्षा हो सके।






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