प्रदीप भारद्वाज, CA, अध्यक्ष -कर सलाहकार संघ बेगूसराय
अमरीका द्वारा भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ का असर:
अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला लिया है। इस निर्णय का सीधा असर भारत के निर्यात और अर्थव्यवस्था पर पड़ने की संभावना है। आइए समझते हैं कि इसका प्रभाव किन-किन स्तरों पर देखने को मिल सकता है।
भारत को संभावित नुकसान
👉 निर्यात महंगा होगा – 25% अतिरिक्त शुल्क लगने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। इससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) कम होगी।
👉 Export में गिरावट – अमेरिकी खरीदार महंगे सामान से दूरी बना सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यात प्रभावित होगा। खासकर Textile, Steel, एल्यूमीनियम और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर पर सीधा असर पड़ेगा।
👉 MSME सेक्टर पर दबाव – छोटे और मझोले उद्योग (MSME) कीमत घटाकर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं होते। इसलिए इस टैरिफ का बोझ उन्हें और ज्यादा प्रभावित करेगा।
भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
👉 व्यापार घाटा बढ़ेगा – अमेरिका को निर्यात घटने और Import स्थिर रहने से भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ सकता है।
👉 Employment पर असर – एक्सपोर्ट आधारित उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
👉 विदेशी मुद्रा आय में कमी – निर्यात घटने से डॉलर की आमदनी कम होगी, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका के 25% टैरिफ से निपटने के लिए भारत की रणनीति
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने के फैसले से भारत के निर्यात और Economy पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए भारत को बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी।
✅ राजनयिक बातचीत (Diplomatic Dialogue)
भारत को अमेरिका से उच्च-स्तरीय बातचीत कर इस टैरिफ को कम कराने या हटाने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौतों में संतुलन बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।
✅ नए निर्यात बाजारों की खोज
भारत को अपने निर्यात को केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रखना चाहिए। Europe, Middle East, Africa, South East Aisa, जैसे उभरते हुए बाजारों में संभावनाएं तलाशनी होंगी।
✅ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता
अमेरिकी दबाव से बचने के लिए भारत को अपनी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना होगा। इससे न केवल देश की मांग पूरी होगी बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा।
✅ प्रोत्साहन योजनाएँ
सरकार को उन सेक्टर्स को विशेष सहायता देनी चाहिए जो अमेरिकी बाजार पर सबसे अधिक निर्भर हैं, ताकि वे इस झटके से उबर सकें।
✅ WTO में शिकायत
भारत इस मामले को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भी उठा सकता है, ताकि वैश्विक स्तर पर न्याय की मांग की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत सही रणनीति अपनाता है तो यह चुनौती अवसर में भी बदली जा सकती है और भारत अपने निर्यात को और ज्यादा विविधतापूर्ण बना सकता है।





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