बेगूसराय, 24 सितंबर 2025। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
राजकीय अयोध्या शिव कुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय, बेगूसराय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन आज आयुर्वेदिक अग्निकर्म और लीच थेरेपी पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इन पद्धतियों को पेन मैनेजमेंट और त्वचा रोगों के उपचार में अत्यंत लाभकारी बताया और लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी प्रस्तुत किया।
पेन मैनेजमेंट में अग्निकर्म का महत्व
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. अजय कुमार भारती ने बताया कि अग्निकर्म से रोगियों को दर्द से तुरंत आराम मिलता है। उन्होंने समझाया कि पाँच धातुओं से बनी शलाका को गर्म कर दर्द वाले स्थलों पर प्रयोग करने से रोगी को तुरंत राहत मिलती है। यह पद्धति शल्य, शालाक्य और स्त्री-प्रसूति रोगों में भी कारगर बताई गई। डॉ. भारती ने साथ ही अग्निकर्म निषेध की प्रक्रियाएँ भी समझाईं।
लीच थेरेपी का डेमोंस्ट्रेशन
डॉ. भारती ने जोंक (लीच) द्वारा रक्तमोक्षण की प्रक्रिया का लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी किया और बताया कि यह पद्धति त्वचा संबंधी रोगों में अत्यंत प्रभावी है।
मर्म चिकित्सा और अन्य सत्र
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. राकेश कुमार जायसवाल ने रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी आपात स्थितियों पर चर्चा करते हुए मूर्छा और हृदयजनित अवसाद से निपटने की तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया। वहीं, मर्म चिकित्सक डॉ. रमण रंजन ने मर्म चिकित्सा को दर्द प्रबंधन में तत्काल प्रभावकारी बताते हुए साँस की गति के साथ मर्म बिंदुओं को उत्तेजित करने की तकनीक समझाई।
प्राचार्य ने किया उद्घाटन
आज दूसरे दिन के सत्र का उद्घाटन प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने किया। उन्होंने लीच थेरेपी और अग्निकर्म को आयुर्वेद की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए छात्रों से इनसे सीख लेने की अपील की। आयोजन सचिव डॉ. संतोष कुमार सिंह ने सेमिनार को सफल बताते हुए कहा कि इसमें हुई वैज्ञानिक बहस से प्रतिभागियों और छात्रों को बहुत कुछ सीखने को मिला।
विशेषज्ञों और चिकित्सकों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर डॉ. दिलीप कुमार वर्मा, डॉ. जीपी शुक्ला, डॉ. अखिलेश जायसवाल, डॉ. अखिलेश सिंह, डॉ. इंदु कुमारी, डॉ. माधुरी कुमारी, डॉ. सुल्ताना परवीन, डॉ. मनीष कुमार आलोक, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. मुन्ना कुमार, डॉ. राजीव कुमार शर्मा, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. आनंद मिश्रा, डॉ. नंदकुमार साहनी, डॉ. विजेंद्र कुमार, डॉ. सुशांत कुमार, डॉ. लाल कौशल कुमार, डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह, डॉ. अमलेश कुमार, डॉ. ओमप्रकाश द्विवेदी, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. किश्वर सुल्ताना, डॉ. राम सागर दास, डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा, डॉ. उर्वशी सिन्हा सहित अनेक चिकित्सक और शिक्षाविद उपस्थित रहे।
विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों का संचालन डॉ. अनिल कुमार, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. राजीव कुमार शर्मा और डॉ. विजेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से किया।





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