भगंदर व ऑटिज्म उपचार में आयुर्वेद की आधुनिक भूमिका पर हुआ मंथन
बेगूसराय| 11 जनवरी 2026 |नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
राजकीय अयोध्या शिव कुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय, बेगूसराय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन एवं एलुमिनी मीट का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। समापन दिवस की शुरुआत वैज्ञानिक सत्र से हुई, जिसमें देश के प्रतिष्ठित आयुर्वेद विशेषज्ञों ने अपने शोध एवं अनुभव साझा किए।
भगंदर रोग में कारण व उपचार दोनों आवश्यक : डॉ. एस. जे. गुप्ता: वैज्ञानिक सत्र को संबोधित करते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एस. जे. गुप्ता ने भगंदर (फिस्टुला) रोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दूषित आहार-विहार के कारण दोष विकृत होकर मांस व शोणित को प्रदूषित करते हैं, जिससे भगंदर रोग उत्पन्न होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद में केवल व्रण (घाव) का नहीं, बल्कि व्रणी (रोगी) का भी समग्र उपचार आवश्यक है। यदि रोगी के शरीर में अन्य कारण मौजूद हों, तो उनका उपचार भी जरूरी है, अन्यथा रोग दोबारा उत्पन्न हो सकता है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस रोग में क्षार सूत्र कर्म प्रभावी उपचार पद्धति है, जिसे विभिन्न औषधीय पौधों के रस से तैयार किया जाता है।
ऑटिज्म व मानसिक विकलांगता में शीघ्र उपचार कारगर : डॉ. शिल्पी गुप्ता: वैज्ञानिक सत्र की दूसरी पारी में सहायक प्राध्यापक डॉ. शिल्पी गुप्ता ने बाल रोगों में मानसिक विकलांगता एवं ऑटिज्म पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों में व्यवहारिक असंतुलन देखा जाता है—कभी उग्रता, कभी अत्यधिक शांति, बार-बार एक ही क्रिया दोहराना, भ्रम, भय अथवा बिना कारण हँसना। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऑटिज्म का जितना जल्दी उपचार शुरू किया जाए, उतना ही बेहतर परिणाम मिलता है, और आयुर्वेदिक चिकित्सा इसमें प्रभावशाली भूमिका निभा रही है।
एलुमिनी मीट में हर वर्ष सम्मेलन आयोजन का सुझाव: शाम को आयोजित द्वितीय सत्र में पूर्ववर्ती छात्र समिति द्वारा एलुमिनी मीट का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता डॉ. लाल कौशल कुमार ने की, जबकि संचालन डॉ. दिलीप कुमार वर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. रिहर्सल प्रसाद सिंह, भूतपूर्व उप निदेशक डॉ. अर्जुन सिंह, डॉ. शंभू नाथ शर्मा, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. राजेश्वर पोद्दार, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. एस. एन. पोद्दार, डॉ. हरिनंदन पासवान सहित कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने एलुमिनी सम्मेलन को प्रतिवर्ष आयोजित करने की सलाह दी।
प्राचार्य ने पूर्ववर्ती छात्रों का किया स्वागत: महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने दूर-दराज जिलों से आए सभी पूर्ववर्ती छात्रों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व संपन्न हुए वैज्ञानिक सत्र को डॉ. बी. के. द्विवेदी एवं डॉ. अनुराधा राय ने भी संबोधित किया। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुन्ना कुमार, डॉ. राजीव कुमार शर्मा, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. प्रमोद कुमार एवं डॉ. दिनेश कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।






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