बेगूसराय | 08 जनवरी 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
आगामी ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) 2026-27 को जनोन्मुखी एवं स्वास्थ्य केंद्रित बनाने के उद्देश्य से जिला पंचायत संसाधन केंद्र (DPRC), कंकौल में आयोजित चार दिवसीय विशेष गैर-आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का गुरुवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 5 जनवरी से 8 जनवरी 2026 तक संचालित किया गया।
जिलेभर के पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता: इस विशेष प्रशिक्षण में जिले के सभी प्रखंडों के मुखिया, पंचायत सचिव तथा पंचायत एवं प्रखंड कार्यपालक सहायकों ने भाग लिया। समापन दिवस पर नावकोठी, मटिहानी, शाम्हो, साहेबपुर कमाल एवं मंसूरचक प्रखंडों के प्रतिभागियों को अंतिम समूह के रूप में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
‘स्वस्थ ग्राम’ की अवधारणा पर केंद्रित रहा प्रशिक्षण: प्रशिक्षण का मुख्य विषय ‘स्वस्थ ग्राम (Healthy Village)’ रहा। इसके अंतर्गत पंचायत प्रतिनिधियों को स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता एवं व्यवहार परिवर्तन से जुड़ी योजनाओं को GPDP में प्रभावी ढंग से शामिल करने हेतु तैयार किया गया। विशेषज्ञों द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि योजनाबद्ध प्रयासों से गांवों को रोगमुक्त एवं सशक्त बनाया जा सकता है।
LSDGs के तहत पंचायतों को सशक्त बनाने की पहल: यह कार्यक्रम लोकल सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (LSDGs) के अंतर्गत पंचायतों को आत्मनिर्भर, स्वास्थ्य-संवेदनशील एवं सक्षम बनाने की दिशा में जिला प्रशासन की एक महत्वपूर्ण पहल है। पिरामल फाउंडेशन के तकनीकी सहयोग से प्रतिभागियों को ग्रामीण स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार, पोषण स्तर बढ़ाने, स्वच्छता व्यवहार को प्रोत्साहित करने तथा सामुदायिक सहभागिता मजबूत करने से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य योजनाओं को GPDP से जोड़ने पर विशेष बल: प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि ‘स्वस्थ ग्राम’ की अवधारणा अपनाने से बीमारियों की रोकथाम, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी तथा कुपोषण, एनीमिया और फाइलेरिया जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। मुखियाओं से आदर्श आरोग्य दिवस की नियमित निगरानी, आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोद भराई व अन्नप्राशन कार्यक्रमों के आयोजन तथा आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन को GPDP से जोड़ने की अपील की गई।
अधिकारियों ने बताई पंचायतों की अहम भूमिका: इस अवसर पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी पूजा प्रीतम ने कहा कि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पंचायत प्रतिनिधियों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार डेटा आधारित एवं समावेशी योजनाएं तैयार करने में सक्षम बनाते हैं। वहीं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. गोपाल मिश्रा ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में पंचायतों की सक्रिय भूमिका को आवश्यक बताते हुए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के नियमित अनुश्रवण पर जोर दिया।
प्रशिक्षण को सफल बनाने में इनकी रही अहम भूमिका: कार्यक्रम की सफलता में DPRC के प्रभारी मास्टर ट्रेनर प्रवीण कुमार (DPRC प्रबंधक), पिरामल फाउंडेशन के जिला प्रतिनिधि दीपक मिश्रा, आश्रेय कुमार एवं श्वेता कुमारी तथा DPRC टीम के मीनू रानी, अविनाश कुमार, संजय कुमार एवं राजीव कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।







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