बेगूसराय। 30 दिसंबर 2025 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़‘
कला एवं संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन बेगूसराय तथा बिहार कला मंच, पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी “अभिव्यंजना” का दूसरा दिन मंगलवार को प्रेक्षागृह, कंकौल में उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। भीषण ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में कला प्रेमी, विद्यार्थी और आम दर्शक प्रदर्शनी देखने पहुंचे तथा कलाकारों से संवाद कर कलाकृतियों की बारीकियों को समझा।
जिला खेल पदाधिकारी ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन: आज प्रदर्शनी का अवलोकन जिला खेल पदाधिकारी बिट्टू कुमार ने किया। उन्होंने प्रदर्शित कलाकृतियों की सराहना करते हुए कलाकारों के रचनात्मक प्रयासों की प्रशंसा की और कहा कि इस तरह की प्रदर्शनियां स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं।
पटना कलम को पुनर्जीवित करने का प्रयास: प्रदर्शनी में बेगूसराय के कलाकार वीरेंद्र कुमार नागर द्वारा लुप्तप्राय होती जा रही पटना कलम (कंपनी शैली) को पुनर्जीवित करने का सराहनीय प्रयास प्रस्तुत किया गया। उनकी पेंटिंग्स “पॉपकॉर्न बेचती लड़की” और “बेबी कॉर्न बेचती महिला” में पटना कलम की जीवंत झलक देखने को मिली। इस प्रयास की पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ कलाकार प्रो. श्याम शर्मा ने भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
सामाजिक कुरीतियों पर कला के माध्यम से प्रहार: वरिष्ठ कलाकार इंद्रमोहन प्रसाद ने अपनी पेंटिंग्स के जरिए भ्रूण हत्या, गरीबी और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को उजागर करते हुए इन्हें समाप्त करने का सशक्त संदेश दिया।
मूर्तिकला और पर्यावरण संरक्षण का संदेश: मूर्तिकार मनीष कुमार कौशिक द्वारा निर्मित श्वेत मार्बल की मूर्ति “खुशी” दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें बादलों पर आनंद और उल्लास में उड़ती महिला आकृति को दर्शाया गया है। वहीं प्रवीण कुमार की ब्रास मूर्ति में योग के माध्यम से संतुलन का प्रभावशाली चित्रण किया गया। उन्होंने मिट्टी की मूर्ति से ब्रास मूर्ति बनने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी भी दर्शकों को दी।
पर्यावरण और भावनाओं का सजीव चित्रण: मनोज कुमार साहनी की पेंटिंग में पृथ्वी को माँ के रूप में दर्शाते हुए अंधाधुंध वृक्ष कटाई से उत्पन्न वैश्विक असंतुलन और वन्यजीवों के विलुप्त होने के खतरे को उकेरा गया, जो पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देती है। इसके अतिरिक्त राजीव कुमार शर्मा की माँ-बच्चे की भावनात्मक पेंटिंग, मिनल कुमारी की मिथिला शैली में राधा–कृष्ण तथा मनीष कुमार की मिथिला पेंटिंग में राम विवाह का दृश्य दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित करता रहा।
कला के व्याकरण और प्रशिक्षण पर सशक्त प्रस्तुति: यथार्थवादी चित्रकला के अंतर्गत वाटरकलर माध्यम में स्टिल लाइफ और लैंडस्केप चित्रों के जरिए कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, बेगूसराय श्याम कुमार सहनी ने कला के व्याकरण, प्रशिक्षण और उसकी उपयोगिता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। यह प्रदर्शनी केवल कलाकृतियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने, प्रकृति से प्रेम और संतुलन का संदेश देने का सशक्त माध्यम भी है। “अभिव्यंजना” यह सिद्ध करती है कि कला समाज का सजीव आईना है।






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