बेगूसराय। 4 जनवरी 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
केंद्रीय मंत्री सह बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह ने कहा कि वर्ष 2005 में मनरेगा की शुरुआत रोजगार गारंटी और ग्रामीण वेलफेयर के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन कांग्रेस शासनकाल में यह योजना भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई। उन्होंने रिफाइनरी टाउनशिप स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि फर्जी एसेट क्रिएशन, पारदर्शिता की कमी, फर्जी जॉब कार्ड और फंड की हेराफेरी मनरेगा की पहचान बन गई थी।
2014 के बाद: मनरेगा में सुधारों का दौर : गिरिराज सिंह ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद मनरेगा के हर पहलू की नए सिरे से समीक्षा की गई और लगातार सुधार किए गए। मोदी 1.0 और 2.0 के दौरान मनरेगा का बजट 2.13 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8.54 लाख करोड़ रुपये किया गया, जो लगभग चार गुना है।
महिलाओं और पारदर्शिता पर विशेष जोर: उन्होंने बताया कि सरकार ने महिलाओं की भागीदारी, आधार सीडिंग और DBT को प्राथमिकता देते हुए मनरेगा में पारदर्शिता और श्रमिक कल्याण को मजबूत किया।
आंकड़ों में मनरेगा का बदलाव: महिलाओं की भागीदारी: 48% से बढ़कर 56.8%, नरेगासॉफ्ट में आधार सीडिंग (सक्रिय मजदूर): 76 लाख से बढ़कर 12.11 करोड़, आधार पेमेंट ब्रिज सिस्टम (APBS): शून्य से 11.92 करोड़, मजदूर जियो-टैग्ड परिसंपत्तियां: 6.45 करोड़ से अधिक, DBT भुगतान: 37% से बढ़कर 99.99%, NMMS व एरिया ऑफिसर मॉनिटरिंग ऐप: 21 मई 2021 से लागू,
VB-G-RAM-G: विकसित भारत 2047 की ओर ग्रामीण परिवर्तन की नई पहल : गिरिराज सिंह ने कहा कि मनरेगा में व्यापक सुधारों के बाद मोदी 3.0 में VB-G-RAM-G एक्ट की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक ग्रामीण भारत को विकसित भारत की मजबूत नींव बनाना है। यह अधिनियम ग्रामीण अर्थव्यवस्था के समग्र विकास, रूरल कनेक्टिविटी और स्वावलंबन पर केंद्रित है।
रोजगार से आगे, स्थायी आय पर फोकस: उन्होंने बताया कि VB-G-RAM-G केवल “काम दो और भूल जाओ” की नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि लॉन्ग टर्म इनकम जनरेशन पर आधारित है। इसके तहत स्किल बिल्डिंग, उद्यमिता और ग्रामीण मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे कृषि और श्रम के बीच संतुलन बनेगा।
अतिरिक्त रोजगार और किसानों को राहत: मंत्री ने कहा कि इस योजना में 25 दिनों का अतिरिक्त रोजगार गारंटी प्रावधान है, जिससे लगभग 75 करोड़ अतिरिक्त श्रमदिवस सृजित होने की संभावना है। फार्मिंग सीजन में मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को किसी भी जिले या ब्लॉक में 60 दिनों की रोक लगाने का अधिकार दिया गया है।
जवाबदेही, तकनीक और पंचायत सशक्तिकरण: केंद्र-राज्य फंडिंग पैटर्न को 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्यों की जवाबदेही बढ़ेगी और फंड के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।योजना में एसेट क्रिएशन के साथ एसेट मॉनिटरिंग, समय पर भुगतान, देरी पर ब्याज, AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम, मजबूत सोशल ऑडिट और केंद्र-राज्य स्तर पर स्टेयरिंग कमेटियों का प्रावधान किया गया है। पंचायतों को अधिक सशक्त बनाया गया है।
विकसित गांव, विकसित भारत: गिरिराज सिंह ने कहा कि VB-G-RAM-G एक्ट महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के विचारों को आत्मसात करता है। यह विकसित भारत 2047 की दिशा में एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप है, क्योंकि विकसित गांव ही विकसित भारत की नींव हैं।







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