फ़ाइलेरिया मुक्त बेगूसराय बनाना हमारी प्राथमिकता : डॉ अशोक कुमार
बेगूसराय | 09 फरवरी 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में बेगूसराय जिला एक बार फिर निर्णायक कदम उठाने जा रहा है। इसी क्रम में 10 फरवरी 2026 से सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
मीडिया की भूमिका अहम : सिविल सर्जन: कार्यशाला को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार ने कहा कि फाइलेरिया मुक्त बेगूसराय बनाना स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि 10 फरवरी से जिले में फाइलेरिया रोधी दवाओं का सामूहिक सेवन सुनिश्चित किया जाएगा।
11 फरवरी को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा एमडीए कैंप: उन्होंने आगे बताया कि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 11 फरवरी को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा एमडीए कैंप लगाया जाएगा। इन कैंपों में बूथ बनाकर स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने लक्षित लाभार्थियों को दवा का सेवन कराएंगे। इसके साथ ही जीविका समूह के सभी सदस्यों को भी दवा खिलाई जाएगी।
घर-घर सर्वे और स्कूलों में विशेष बूथ: इसके अतिरिक्त, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा खिलाएंगे। वहीं, अंतिम तीन दिनों में जिले के सभी स्कूलों में विशेष बूथ लगाकर बच्चों को दवा सेवन कराया जाएगा।
दवाएं पूरी तरह सुरक्षित : डॉ अशोक कुमार: डॉ अशोक कुमार ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गठिया या अन्य सामान्य बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति भी इन दवाओं का सेवन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि दवा खाने के बाद किसी को हल्की मितली या चक्कर महसूस हो तो घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी दवा से नष्ट हो रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में रैपिड रिस्पांस टीम तैनात रहेगी।
31 लाख से अधिक लाभार्थियों को दवा खिलाने का लक्ष्य: जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुभाष झा ने बताया कि इस अभियान के तहत जिले के कुल 31,97,356 लाभार्थियों को 1693 टीमों के माध्यम से डीईसी, अल्बेंडाजोल एवं आईवरमेक्टिन की निर्धारित खुराक खिलाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवाओं का वितरण नहीं किया जाएगा, बल्कि स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने दवा खिलाएंगे। दवा खाली पेट नहीं लेनी है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी।
फाइलेरिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ गोपाल मिश्रा ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग मच्छर के काटने से फैलने वाली गंभीर बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है।उन्होंने बताया कि फाइलेरिया से हाइड्रोसील, लिम्फेडेमा और काइलूरिया जैसी गंभीर समस्याएं होती हैं, जिससे मरीजों को सामाजिक भेदभाव का भी सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्ष तक फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर ले तो उसे जीवन भर इस रोग से बचाया जा सकता है।
उपस्थित अधिकारी व प्रतिनिधि: कार्यशाला में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी संजीव कुमार, शिवन पटेल, अभिषेक भारती, रोगी हितधारक मंच के सदस्य सुनील कुमार, सुधीर कुमार, जीविका सदस्य, जिला स्तरीय स्वास्थ्य पदाधिकारी, मीडिया सहयोगी सहित डब्ल्यूएचओ, सीफार एवं पिरामल के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।





Total views : 69866