दिनकर कला भवन परिसर में विचार गोष्ठी व सांस्कृतिक प्रस्तुति आयोजित
बेगूसराय | 4 जनवरी 2026 | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
बेगूसराय की पुरानी सांस्कृतिक संस्था जन संस्कृति मंच (जसम) द्वारा दिनकर कला भवन परिसर में महान रंगकर्मी सफदर हाशमी की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनगीत, शहीद गान, कविता पाठ और विचार गोष्ठी के माध्यम से सफदर हाशमी के सांस्कृतिक योगदान को याद किया गया।

जनगीत और शहीद गान से गूंजा परिसर: कार्यक्रम की शुरुआत रंगनायक द थियेटर के कलाकार देवेंद्र कुंवर द्वारा प्रस्तुत जनगीत से हुई। वहीं, युवा रंगकर्मी चंदन वत्स ने शहीद गान ‘उनसे प्रणाम कहना, उनको सलाम कहना’ प्रस्तुत कर माहौल को भावुक बना दिया। शिक्षाविद् मुकेश कुमार ने काव्य पाठ के माध्यम से सामाजिक चेतना का संदेश दिया। इस अवसर पर कमल वत्स द्वारा संविधान बचाओ–देश बचाओ विषयक पुस्तक स्टॉल भी लगाया गया।
सफदर हाशमी और आज का रंगमंच: विचार गोष्ठी: इस मौके पर “सफदर हाशमी का रंगमंच और हमारा आज का रंगमंच” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जसम के राज्य सचिव दीपक सिन्हा ने कहा कि सफदर हाशमी को याद करना केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे एक सांस्कृतिक संघर्ष को याद करना है। उन्होंने कहा कि सफदर ने रंगमंच को महलों से निकालकर सड़कों तक पहुंचाया और भारतीय नुक्कड़ नाटक को नई पहचान दी।
सत्ता, शोषण और असमानता के खिलाफ आवाज: युवा रंगनिर्देशक इम्तियाजुल हक डब्लू ने कहा कि सफदर हाशमी का रंगमंच शोषितों-वंचितों की आवाज था, जो सत्ता और सामाजिक असमानता पर सीधा प्रहार करता था। वहीं, एक्टिविस्ट कमल वत्स ने 1973 में स्थापित जन नाट्य मंच (जनम) के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया और 4 जनवरी की तिथि के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।
जनता के रंगमंच के प्रतीक थे सफदर: पत्रकार सह कवि प्रवीण प्रियदर्शी ने कहा कि सफदर का मानना था कि असली दर्शक मजदूर, किसान और आम नागरिक हैं। जसम के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सफदर ने दस्तागोई और लोक कलाओं को नाटकों में शामिल कर रंगमंच की पहुंच को व्यापक बनाया। साहित्यकार नरेंद्र कुमार सिंह ने रंगमंच को लोकतंत्र और संघर्ष का माध्यम बताया।
सांस्कृतिक संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प: एआईएसएफ के ईशु वत्स और रंगकर्मी संतोष राही ने कहा कि 1989 में ‘हल्ला बोल’ के दौरान हुए हमले के बावजूद सफदर हाशमी का संघर्ष आज भी प्रेरणास्रोत है। प्रत्यक्ष गवाह के संपादक पुष्कर कुमार सिंह ने कहा कि चुनौतियां भले ही बड़ी हों, लेकिन रंगमंच को बचाने की लड़ाई जारी रखनी होगी।
फरवरी में नुक्कड़ लाइव थिएटर फेस्टिवल: जसम की ओर से घोषणा की गई कि फरवरी माह में नुक्कड़ लाइव थिएटर फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में रंगकर्मी हरिकिशोर ठाकुर, राजाराम आर्य, पंकज कुमार सिन्हा, डी एन ब्रह्मचारी, राजू सिन्हा तनु, भारत भूषण मिश्रा अधिवक्ता, मो. तनवीर अधिवक्ता, नीलेश झा, रामपुकार दास, राहुल कुमार, रंजन कुमार, वरिष्ठ रंगकर्मी अरविंद कुमार सिन्हा, आरवाईए के राज्य पार्षद संजय कुमार, पंकज कुमार झंटू सहित वरिष्ठ और युवा रंगकर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।





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