नेशनल पॉजिटिव न्यूज़ पटना | दिनांक – 22 अक्टूबर, 2025
दीपावली के समापन के साथ ही भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित भाई दूज का पर्व नजदीक आ गया है। इस वर्ष भाई दूज 23 अक्टूबर (गुरुवार) को मनाया जाएगा। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाला यह पर्व भारतीय संस्कृति में स्नेह, सुरक्षा और पारिवारिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
ग्रहों का शुभ संयोग, रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग बनेगा खास अवसर पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर की रात 8:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्टूबर की रात 10:46 बजे तक रहेगी। इस दौरान रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जो इस पर्व को अत्यंत शुभ बना रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन योगों में बहन द्वारा भाई को तिलक करना विशेष फलदायी माना गया है।
भाई दूज का तिलक मुहूर्त : भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं। इस वर्ष तिलक के मुख्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
🕕 सुबह शुभ चौघड़िया मुहूर्त: शुभ (उत्तम): सुबह 6:27 बजे से 7:51 बजे तक
लाभ (उन्नति): दोपहर 12:05 बजे से 1:30 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 1:30 बजे से 2:54 बजे तक
📿 सामान्य तिलक मुहूर्त: प्रातः 9:12 बजे से दोपहर 1:26 बजे तक
वैकल्पिक मुहूर्त: दोपहर 3:00 बजे से 5:00 बजे तक
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस समय बहनें अपने भाइयों का मुख पूर्व दिशा की ओर रखकर तिलक करें। तिलक के लिए रोली, चावल, दीपक और मिठाई का प्रयोग शुभ माना गया है।
धार्मिक महत्व और कथा : भाई दूज को “यम द्वितीया” भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया और तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना की। प्रसन्न होकर यमराज ने आशीर्वाद दिया कि इस दिन जो बहन अपने भाई का तिलक करेगी, उसके भाई की आयु दीर्घ होगी और वह यम के भय से मुक्त रहेगा। इसी परंपरा के तहत हर वर्ष बहनें भाई के कल्याण और समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
परंपरा और आज का स्वरूप : आज भी गाँव से लेकर शहरों तक यह पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर, आरती उतारकर और घर का बना भोजन खिलाकर अपना स्नेह व्यक्त करती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार और आशीर्वाद देते हैं। कई परिवारों में इस दिन चित्रगुप्त पूजा का आयोजन भी किया जाता है।
गोधन पूजा: परंपरा और प्रेम का अनोखा संगम, बहनों ने भाई की दीर्घायु की कामना के साथ की पूजा
बेगूसराय | नेशनल पॉजिटिव न्यूज़ | 22 अक्टूबर 2025
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के अवसर पर बुधवार को पारंपरिक गोधन पूजा बड़े ही श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगा। बहनों ने अपने भाइयों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पारंपरिक गीतों के बीच पूजा-अर्चना करती है।
इस दिन महिलाएं गाय के गोबर से बनी ‘गोधन’ की पूजा करती हैं। ओखल और मूसल से गोधन को पीटा जाता है, जो बुराइयों और नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक माना जाता है। पूजा में सांप और यमराज के प्रतीकात्मक रूप भी शामिल किए जाते हैं। लोक मान्यता के अनुसार, इस दिन बहनें अपने भाइयों को ‘रेंगनी के काँटा’ से प्रतीकात्मक रूप से श्राप देती हैं और फिर पूजा कर उन्हें शापमुक्त करती हैं। ऐसा माना जाता है कि यह कर्म भाई के जीवन में शुभ फल और सुरक्षा लाता है।
यह पर्व सामाजिक एकता और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक है।







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