अमेरिका ने पहले भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिसे अब बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। इसके चलते भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाज़ार में और महंगे हो जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, उत्पादन और रोज़गार पर देखने को मिल सकता है।

डॉ. आशीष सुमन (गायत्री डेंटल क्लिनिक, बेगूसराय): 🇮🇳 भारतीय उत्पादों पर असर: उच्च टैक्सेशन के कारण अमेरिकी उपभोक्ता भारतीय उत्पादों से दूरी बना सकते हैं। इससे भारत में उत्पादन प्रभावित होगा और बेरोज़गारी की समस्या भी बढ़ सकती है। 🇷🇺 रूस-भारत संबंध और विवाद की जड़विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करे, इसी वजह से यह विवाद गहराया है। हालांकि, रूस और भारत की दोस्ती दशकों पुरानी और अटूट मानी जाती है।

राम रंजन सिंह (पूर्व प्रमंडलीय सचिव, बेगूसराय एवं पूर्व प्रान्तीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ, ग्रुप-सी)“: “भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका प्रतिकूल असर तो होगा, लेकिन हमें अमेरिकी उत्पादों पर भी जबाबी कार्रवाई करनी चाहिए। डराने वाली अमेरिकी नीति के आगे हमें किसी भी हाल में घुटने नहीं टेकने चाहिए। अब गुलामी हमें मंजूर नहीं। अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं।”

डॉ. रोहित कुमार (राधिका होमियो क्लिनिक, स्टेशन रोड, बेगूसराय) अमेरिका का यह टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था पर सीमित असर डालेगा। अमेरिका व्यापार की बात करता है लेकिन व्यापार को ही अवरुद्ध करता है। उसका मकसद केवल अपना हित साधना है। हमें समझना होगा कि अमेरिका किसी का स्थायी मित्र नहीं हो सकता।”“आज भारत पर लगाए गए 25% से बढ़ाकर 50% टैरिफ का असर हमारी अर्थव्यवस्था पर बहुत गहरा नहीं पड़ेगा। भारत को अपनी कूटनीतिक और सामरिक शक्ति को और मज़बूत करना होगा। कोई भी देश तभी सुरक्षित रह सकता है जब वह आत्मनिर्भर और सशक्त हो। भारत कभी झुका नहीं है और न ही कभी झुकेगा। जय हिंद, वंदे मातरम्।”
🔎 समाधान क्या है?भारत को अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय नए बाज़ार तलाशने होंगे – यूरोपीय देशों, खाड़ी देशों और एशियाई देशों में निर्यात बढ़ाना होगा। साथ ही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देना और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मज़बूत करना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।





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