बिहार विधान सभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ने लगी है। जल्द ही इसके तिथि की घोषणा की जा सकती है। इसको लेकर रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके होने वाले बिहार विधानसभा सभा चुनाव के बारे में लोगों को जानकारी दी।
📌 मुख्य बिंदु
1. मतदाता सूची का शुद्धीकरण (Purification of Voter List / SIR) : मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि 22 वर्षों बाद बिहार की मतदाता सूची का “शुद्धीकरण” हुआ है, विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के माध्यम से। यह प्रक्रिया विधि सम्मत थी और Representation of the People Act के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है। आयोग को राजनीतिक दलों, मतदाताओं और अन्य हितधारकों से इसकी व्यापक स्वीकृति मिली।
2. चुनाव की तिथियाँ और समयबद्धता : उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव 22 नवंबर 2025 से पहले ही सम्पन्न कराए जाएंगे, क्योंकि उस दिन विधानसभा की अवधि समाप्त हो रही है। अभी तक चुनाव की संख्या (फेज) स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन आयोग जल्द ही इस पर निर्णय लेगा।
3. नए सुधार / पहल (17 नई पहल) : उन्होंने बताया कि चुनाव में 17 नई पहल लागू की जाएंगी, जिनमें से कई को देशभर में अपनाया जाएगा।
कुछ महत्वपूर्ण सुधार : 👉 प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1,200 मतदाता होंगे, ताकि बहुत ज्यादा भीड़ न हो। 👉 100% वेबकास्टिंग हर बूथ पर की जाएगी, ताकि मतदान की प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से निगरानी में रहे। 👉 EVM पर प्रत्याशियों की रंगीन फोटो, और बड़े फॉन्ट में नाम/सीरियल नंबर होंगे, ताकि मतदाता पहचान आसान हो सके। 👉 मतदाता पहचान पत्र (EPIC / Voter ID कार्ड) अब 15 दिनों के भीतर जारी किए जाएंगे। 👉 मतदान केंद्रों के बाहर मोबाइल जमा करने की व्यवस्था होगी — यानी वोट देने के दौरान मोबाइल साथ अंदर नहीं ले जा सकेंगे। 👉 राजनीतिक दलों को मतदान केंद्र के लगभग 100 मीटर की दूरी पर एजेंट बूथ स्थापित करने की अनुमति होगी।
4. आधार (Aadhaar) और नागरिकता : चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। आधार विवरण को मतदाता सूची सत्यापन में उपयोग किया जाएगा, लेकिन अन्य दस्तावेजों की भी आवश्यकता होगी।
5. वोटर सूची विवाद / घुसपैठिए नामों का सवाल: पत्रकारों द्वारा पूछे गए “घुसपैठिए मतदाता” या “नाम काटे गए” सवालों पर, उन्होंने SIR प्रक्रिया और नियमों का हवाला देते हुए विवाद को शांत किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद मतदाता सूची में पुनः संशोधन करना उचित नहीं है।
6. अन्य निर्देश और अपील: उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें और उत्तरदायी बनें। BLOs (Booth Level Officers) और चुनावकर्मियों की भूमिका की सराहना की गई।





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